मैनपुरी। विकास खंड करहल के गांव सहन को सारस विलेज को रूप में विकसित किया जाएगा। इसे चुनने के पीछे खास बात ये है कि सहन का तालाब सारसों की प्राकृतिक प्रवास स्थली है। सहन स्थित तालाब मुख्य विकास अधिकारी के ड्रीम प्रोजेक्ट सारस सर्किट का भी अभिन्न अंग है।
गांव सहन में लगभग 30 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तालाब फैला हुआ है। यहां सारसों की संख्या अच्छी रहती है। आम दिनों में भी यहां एक सैकड़ा से अधिक सारस नजर आते हैं। जोड़ों में विचरण करते सारस यहां देखते ही बनते हैं। वहीं यह सारसों की प्राकृतिक प्रवास स्थली भी है। लंबे समय से सारसों का बसेरा यहां रहा है। ऐसे में इस गांव सारस विलेज के रूप में विकसित करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने पहल की है। इ
सके लिए तालाब की खोदाई का कार्य पूरा करने के साथ ही अब इसके सुंदरीकरण के लिए काम किया जा रहा है। इसके लिए यहां वॉच टॉवर का भी निर्माण किया जा रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों को सारसों की ये प्राकृतिक प्रवास स्थली खूब लुभाएगी।
दरअसल सहन स्थित तालाब सारस सर्किट का भी एक हिस्सा है। सारसों के संरक्षण के लिए जिले में तालाबों को जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित किया गया है। ये सारसों के संरक्षण के लिए अहम है। सारस सर्किट का प्रोजेक्ट मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है। जल्द ही ये कार्य पूरा हो जाएगा।
वॉच टॉवर से कर सकेंगे सारसों का दीदार
मनरेगा द्वारा सहन तालाब के किनारे वॉच टावर का निर्माण कराया जा रहा है। ये वॉच टॉवर स्थाई बनाया जा रहा है। सहन आने वाले पर्यटक वॉच टावर से बड़े क्षेत्र में सारसों का दीदार कर सकेंगे।
सारस नवयुवक समिति को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी
गांव में सारसों के संरक्षण और तालाब को गंदा न करने के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए गांव के नवयुवाओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने इसके लिए सारस नवयुवक समिति का गठन कराने के आदेश दिए हैं। ये समिति सारस और तालाब दोनों का संरक्षण करेगी। किसी प्रकार की समस्या होने पर अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
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वर्जन
मैनपुरी में सारस सर्वाधिक संख्या में पाए जाते हैं। वहीं सहन वेटलेंड सारसों की प्राकृतिक प्रवास स्थली है। इसे सारस विलेज के रूप में विकसित करने के लिए कार्य किया जा रहा है। इससे सहन को एक पहचान मिलेगी। -ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।