सहज सागर ने क्षुल्लक अवस्था के बाद मुनि दीक्षा ली
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। डॉक्टर सुशील जैन के क्षुल्लक अवस्था के बाद कुंजवान उदगांव में मुनि दीक्षा ली है। उन्होंने ज्ञान को चर्चा नहीं चर्या तथा कथनी को भाषण नहीं आचरण का विषय बनाकर एक आदर्श प्रस्तुत किया है।
सिटी पोस्ट आफिस के सामने जैन क्लीनिक के डॉक्टर सौरभ जैन के पिता डॉक्टर सुशील जैन ने लोगों की उस अवधारणा को गलत साबित किया है कि विद्वान दीक्षा नहीं लेते। यह बातें आचार्य प्रसन्न सागर ने अपने शिष्य दीक्षार्थी क्षुल्लक सहज सागर एवं ब्रह्मचारी पंडित दीपचंद्र जैन को जैनेश्वरी दीक्षा देने से पूर्व कही। साधना महोदधि तपो मूर्ति अंतरमना आचार्य के सानिध्य में महाराष्ट्र्र कोल्हापुर जनपद के कुंजवन स्थित सन्मति तीर्थ पर महाव्रत की दीक्षा सम्पन्न होकर यथाजात बालकवत दिगंबर मुद्रा प्राप्त कर प्रवर्तक मुनि सहज सागर नाम प्राप्त करके अंतर्मना संघ में आचार्य श्री व उपाध्याय श्री के बाद तीसरा स्थान प्राप्त किया है।
इससे पूर्व 16 अक्तूबर 2005 में अनमोल सागर, 16 फरवरी 2010 में अर्घ सागर भी मैनपुरी से मुनि बन समाधि हो चुकी है। 23 जनवरी 1993 में आर्यका स्वाधियायमति माताजी के बाद वर्तमान में वह मैनपुरी जनपद के एकमात्र मुनि हैं। वर्णी क्षुल्लक सहज सागर की मुनि दीक्षा होने से सर्वतोभद्र श्री परिवार के साथ जैन समाज में हर्ष है। रमेशचंद जैन, प्रमोद जैन, आदेश जैन, आशीष जैन, निशंका जैन, रेखा जैन, उमेश चंद्र जैन एडवोकेट, शिवम जैन, विशाल जैन जौली, अनंत कुमार जैन, गौरव जैन उपवन, संजय जैन लोहिया, संजय गोल्डी, श्रवण कुमार जैन, राकेश जैन ने क्षुल्लक से मुनि होने पर अनुमोदना की है।