सेना की नौकरी छोड़ हो गए थे बैरागी
श्यामसुंदर दास उर्फ पवन कुमार 17 साल पहले बैरागी होकर बरसाना के मौनी बाबा आश्रम आ गए। उससे पहले सेना के कमांड हॉस्पिटल लखनऊ में लैब टैक्नीशियन थे। सेना की नौकरी छोड़कर बैरागी हो गए। उसके बाद से वह बरसाना के मोनी बाबा आश्रम में रहकर भजन करते थे। वेदप्रकाश के तीन बेटों में सबसे बड़े श्यामसुंदर ही थे। उनसे छोटे मदनमोहन दास हैं।
सेना में डॉक्टर रहे मदनमोहन दास साल 2020 में अवकाश प्राप्त होने के बाद बैरागी हो गए। वृंदावन के राजपुर खादर में निताईगौर कुंज आश्रम में रह रहे हैं। सबसे छोटा भाई अनुज है, जो फरीदाबाद में नौकरी कर रहा है। केवल अनुज ने विवाह किया। इनसे दोनों बड़े भाई अविवाहित ही रहे। मृतक साधु श्यामसुंदर दास के पिता वेदप्रकाश हरियाणा पुलिस से रिटायर्ड हैं। वह अपने बेटे मदनमोहन दास के पास ही रह रहे हैं।
मूलत: बुलंदशहर के मोरोनी गांव के रहने वाले वेदप्रकाश अपने परिवार के साथ करीब 42 साल पहले हरियाणा के फरीदाबाद में बल्लभगढ़ आ गए थे। यहां ही तीनों बेटों की पढ़ाई और परवरिश हुई। फिलहाल साधु की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। छोटे भाई मदनमोहन दास ने बरसाना पुलिस को पूरी जानकारी लिखकर दी है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।