फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीएम योगी तक पहुंची दुखियारी मां की पुकार: करोड़ों की जायदाद, चार जवान बेटे, फिर भी ठिकाना है वृद्धाश्रम

Sun, 09 Apr 2023 09:43 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमन शर्मा, आगरा

सार

अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी विद्यादेवी की पीड़ा। इसके बाद टीम वृद्धाश्रम पहुंची। हालांकि वृद्धा विद्यादेवी घर न जाने की जिद पर अड़ीं हैं।
विज्ञापन
86 वर्षीय विद्या देवी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगरा के रामलाल वृद्धाश्रम में रह रहीं वृद्धा विद्यादेवी की पीड़ा मुख्यमंत्री तक पहुंच गई। टीम गठित कर जांच शुरू करा दी गई है। शनिवार को प्रशासनिक अफसर ने उनके तीन बेटों की काउंसिलिंग की। वह तो राजी हो गए लेकिन विद्यादेवी घर जाने को राजी नहीं हैं। उनका तो यहां तक कहना है कि मरने पर आश्रम संचालक उनका शव भी बेटों को न दें।

वृद्धाश्रम में रह रही हैं विद्यादेवी

करोड़ों की जायदाद की मालकिन और चार जवान बेटे होने के बाद भी उम्र के अंतिम पड़ाव में विद्यादेवी वृद्धाश्रम में रह रही हैं। वह सिकंदरा के बाईपुर के पास स्थित रामलाल वृद्धाश्रम में हैं। विद्यादेवी आगरा के कमला नगर की रहने वाली हैं। अमर उजाला ने उनकी पीड़ा को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसका संज्ञान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया है।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें - गोकशी में फंसे हिंदू महासभा के पदाधिकारी: एक गोकश जेल में बंद, कैसे हो गया वांछित; पुलिस के खुलासे पर सवाल

 

गठित की गई टीम

उप जिलाधिकारी सदर रजनीश बाजपेई ने बताया कि मुख्यमंत्री के संज्ञान में लेने के बाद टीम गठित कर जांच कराई जा रही है। एसीएम ऋषि राव ने बताया कि विद्यादेवी के लड़कों को शनिवार को तहसील सदर बुलाया गया। तीन बेटे पहुंचे। उनके साथ काउंसिलिंग की गई। बेटे मां को घर ले जाने के लिए तैयार हो गए। पर, विद्यादेवी साथ जाना नहीं चाहती हैं।

 

विज्ञापन

तीन बेटों ने मानी ये शर्त

एसीएम ने बताया कि विद्यादेवी ने कहा कि उनके लड़के उनके लिए हर महीने दवाएं व अन्य खर्चा उनके पास वृद्धाश्रम में भेज दिया करें। इस शर्त को उनके तीन बेटों ने मान लिया। सबसे बड़ा बेटा बाहर होने के कारण काउंसिलिंग में नहीं आ सका। टीम उससे भी बात करेगी।

अब नहीं जाऊंगी घर

इधर, वृद्धाश्रम पर लेखपाल विद्यादेवी का बयान लेने के लिए भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि मेरे बच्चे मेरी दवा का खर्चा आश्रम में ही भिजवा दिया करें, अब घर नहीं जाऊंगी। मेरी मिट्टी को भी मेरे बेटों को आश्रम संचालक न दें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें