बॉलीवुड नाइट में मशहूर संगीतकार जोड़ी सचिन-जिगर ने अपने हिट गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। रोमांटिक और धमाकेदार धुनों के बीच 10 दिवसीय ताज महोत्सव का भव्य समापन हुआ।
बचना ए हसीनों लो मैं आ गया... जैसे ही मशहूर संगीतकार जोड़ी सचिन-जिगर ने ताज महोत्सव के मुख्य मंच पर माइक संभाला तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट और युवाओं के शोर से गूंज उठा। ताज महोत्सव के अंतिम दिन आयोजित बॉलीवुड नाइट में मशहूर जोड़ी ने अपनी जादुई धुनों से हर किसी को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
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कार्यक्रम में सचिन-जिगर ने एक के बाद एक अपने हिट गानों की झड़ी लगा दी। फिल्म स्त्री का चर्चित गाना कमरिया और सुपरहिट ट्रैक माई तेरी चूनरिया लहराई गाना शुरू किया, तो युवा झूम उठे। सचिन-जिगर ने अपनी रूमानी धुनों से फिजा में प्यार का रंग भी घोला। अपना बना ले पिया...गीत पर मंच के हर कोने में मोबाइल की फ्लैशलाइट जल उठी।
दर्शकों ने सुर में सुर मिलाकर इस गीत का आनंद लिया। संगीत की इस महफिल के साथ ही 10 दिवसीय ताज महोत्सव का औपचारिक समापन हुआ। इससे पहले लखनऊ के शीलू श्रीवास्तव ने अपने धनक बैंड के जरिये जबरदस्त प्रस्तुति देकर लोगों को झुमाया। वहीं, ग्वालियर की जानवी डांस अकादमी के बच्चों व वाराणसी के राहुल मुखर्जी ने अन्य साथियों के साथ मिलकर नृत्य के जरिये गंगा की महिमा को पेश किया।
मीरा के प्रेम का सजीव मंचनए स्त्री सशक्तीकरण का संदेश
ताज महोत्सव के समापन के अवसर पर शुक्रवार को मुक्ताकाशीय मंच भक्ति, श्रद्धा और शास्त्रीय कला के अनूठे संगम का साक्षी बना। कथक नृत्यांगना और निर्देशक माया कुलश्रेष्ठ व उनके दल ने मीहिरा: धर्म-श्रद्धा-प्रेम नाट्य के जरिये मीराबाई के जीवन संघर्ष और उनकी अटूट कृष्ण भक्ति के सजीव मंचन दर्शकों को भावविभोर कर दिया। साथ ही समाज को स्त्री सशक्तीकरण का गहरा संदेश भी दिया। प्रस्तुति के माध्यम से माया कुलश्रेष्ठ ने मीरा को केवल एक भक्त के रूप में नहीं, बल्कि शक्ति के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया। मंचन के दौरान दिखाया गया कि मीरा ने पुरुष को कभी प्रतिद्वंद्वी नहीं माना, बल्कि श्रीकृष्ण के रूप में उन्हें अपना सच्चा पथ प्रदर्शक, मित्र और सखा स्वीकार किया। 16वीं सदी के कालखंड को जीवंत करते हुए कलाकारों ने मीरा की आध्यात्मिक यात्रा को एक दिव्य अनुभव में बदल दिया।