सरहद की दीवारों को कच्चा करना है। डिप्लोमेसी अपनी जगह है। देश अपनी जगह हैं लेकिन पब्लिक अपनी जगह। यह बात गुरुवार को प्रो. रफाकत अली खान ने मीडिया के सामने रखी।
वह फोसवाल अध्यक्ष व मशहूर पंजाबी और हिंदी लेखिका अजीत कौर के साथ आगरा कैंट स्थित ग्रांड होटल में सार्क लिटरेचर फेस्टिवल का पोस्टर रिलीज करने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। यह उत्सव विदेश मंत्रालय व भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सहयोग से फाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर्स एंड लिटरेचर (फोसवाल) द्वारा आयोजित किया जा रहा है। मशहूर साहित्यकार ने कहा 1966 में पहली बार पाकिस्तान गया तो अमृतसर और लाहौर में मुझे कोई फर्क नजर नहीं आया। पुराने पंजाबी तो फारसी तक बोल लेते थे। सभी के कल्चर मिले-घुले हैं। पद्मश्री लेखिका अजीत कौर ने कहा कि यह क ार्यक्रम आठ मुल्कों को मिलाने की कोशिश है।
आठ मुल्कों के 150 से ज्यादा कवि, साहित्यकार आएंगे
ग्रांड होटल में चार दिवसीय सार्क लिटरेचर फेस्टिवल का शुभारंभ शुक्रवार को हो रहा है। फेस्टिवल में भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मालदीव व अफगानिस्तान समेत आठ देशों के 150 से ज्यादा कवि, लेखक, पत्रकार, साहित्यकार, लोक कलाकार शिरकत करेंगे। इनमें गांधीजी के पौत्र राजमोहन गांधी, सीताकांत महापात्र, पुष्पेश पंत, प्रो. आशीष नंदी, ओम थानवी, उदय प्रकाश, हुमरा कुरैशी, जिया उस सलाम जैसे साहित्यकार और लेखक भारत से शिरकत कर रहे हैं।