आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) वेबसाइट पर पंजीकरण में गांवों के लोग ज्यादा स्मार्ट हैं। आभा पंजीकरण में ये अव्वल हैं। शहर के मुकाबले देहात के करीब ढाई गुना पंजीकरण हो चुका है। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग ने शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर सख्ती कर दी है।
जिले में 42.58 लाख लोगाें के आभा पर पंजीकरण करना है। इसमें अभी तक 19.33 लाख लोगों की हेल्थ आईडी बन गई है। इसका औसत 45.39 फीसदी है। इसमें देहात के लोगों का पंजीकरण सबसे ज्यादा है। शहर में 13.41 लाख लोगों में से 2.89 लाख लोगों की ही आभा पर आईडी बनी है। इनका औसत 21.62 फीसदी है। इसके मुकाबले देहात की बात करें तो 29.17 लाख लोगाें में से 16.43 लाख के पंजीकरण हो गए हैं। इसका औसत 56.32 फीसदी है। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव को कहना है कि शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों के पंजीकरण बढ़ाने पर जोर दिया है।
नरीपुरा और फतेहाबाद में सबसे कम पंजीकरण
शहरी क्षेत्र की बात करें तो नरीपुरा में 11.07 फीसदी और देहात में फतेहाबाद में सबसे कम 42 फीसदी पंजीकरण हुआ है। सबसे ज्यादा पंजीकरण शहर में नरायच में 38.73 और देहात में अछनेरा में 67 फीसदी पंजीकरण हो गया है।
आभा पंजीकरण के ये हैं फायदे
आभा अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. पीयूष जैन ने बताया कि आभा वेबसाइट पर पंजीकरण होने से लोगों की एक यूनिक हेल्थ आईडी बन जाएगी। इसमें कभी भी इलाज लेने पर उसके पर्चे, जांच समेत अन्य चिकित्सकीय रिकार्ड ऑनलाइन हो जाएंगे। आईडी से देश के किसी भी अस्पताल में इलाज पाने पर डॉक्टर पूर्व के रिकार्ड देख सकते हैं। इससे पर्चे-जांच रिपोर्ट खोने पर भी कोई दिक्कत नहीं होगी। लोग उमंग एप (UMANG App) के जरिये भी पंजीकरण करा सकते हैं।
42,58,965: लोगों के आभा पंजीकरण का है लक्ष्य।
19,33,468: लोगों को आभा पर हुआ पंजीकरण।
29,17,848: ग्रामीण लोगों का होना है पंजीकरण।
16,43,574: लोगों को आभा पर हुआ पंजीकरण।
13,41,117: शहरी लोगों के पंजीकरण का लक्ष्य।
2,89,894: शहरी लोगाें का हो चुका है पंजीकरण।