नगर निगम की सदन की बैठक में उस वक्त जबरदस्त हंगामा हुआ जब महिला पार्षदों ने अपने पतियों के लिए पानी तक की व्यवस्था न होने का विरोध शुरू कर दिया।
विपक्ष की महिला पार्षद पहले तो सदन से बाहर चली गईं और उसके कुछ देर बाद सदन में मेयर की डायस के सामने धरना देने का प्रयास किया। बसपा पार्षद और भाजपा के पार्षदों के पार्षदों के बीच मारपीट तक की नौबत आ गई।
दरअसल शासनादेश के मुताबिक पार्षदों के अतिरिक्त सदन में बिना अनुमति किसी के आने पर प्रतिबंध है। सोमवार को बैठक जेपी सभागार में हुई। तो पतियों को बाहर बैठने को कहा गया।
बैठक में पार्षद
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महिला पार्षदों का आरोप था कि बाहर बैठे उनके पति और छोटे बच्चों के लिए पानी की तक व्यवस्था नहीं थी। भोजनावकाश के दौरान भोजन तो क्या चाय तक के लिए नहीं पूछा गया।
जबकि उनके पास बैठे पुलिस के जवानों और नगर निगम के कर्मचारियों को भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए गए। इससे गुस्साई महिला पार्षद सदन कक्ष से बाहर आ गईं।
उन्होंने महिला होने के नाते भाजपा की पार्षदों को बाहर बुलाने की कोशिश की लेकिन भाजपा की पार्षद अंदर ही बैठी रहीं। इसके कुछ ही देर बाद वे सदन कक्ष में आई और मेयर की डायस के सामने धरने पर बैठने लगी तो बसपा के पार्षद धर्मवीर सिंह ने उन्हें समझाने की कोशिश की और मेयर के समक्ष बात रखने कहा।
सीट से उठे और किया ये
इस बीच भाजपा के पार्षद राहुल चौधरी ने समझा कि धर्मवीर सिंह महिलाओं को उकसा रहे हैं तो वे अपने सीट से उठे और धर्मवीर सिंह का विरोध करने पहुंच गए। इस पर दोनों की बीच जमकर तकरार हुई।
धक्कामुक्की के बाद नौबत मारपीट तक पहुंच गई। भाजपा और विपक्ष के पार्षद आमने सामने आ गए। मामला गरमाता देख मेयर ने सदन की बैठक को पूर्ण घोषित कर दिया।
बाहर जाने लगे तो पार्षदों ने अपनी बात रखने का प्रयास किया। मेयर ने उन्हें समझाया कि सदन की व्यवस्था का सवाल है व्यवस्था के तहत रखा जाए किसी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी।