कासगंज। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एटा-कासगंज के विभाग संघ चालक उमाशंकर शर्मा ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने 1990 में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का बिगुल फूंका था। उनके इस आह्वान पर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने घोषणा की थी कि 30 अक्टूबर को अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा।
तत्कालीन मुख्यमंत्री की इस चुनौती को विश्व हिंदू परिषद और समाज ने स्वीकार किया। लोगों ने अपने साधनों से अयोध्या के लिए कूच करना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि एटा-कासगंज के लोगों में मंदिर आंदोलन को लेकर जुनून था।विभाग संघ चालक अमर उजाला से श्रीराम मंदिर के मुद्दे पर बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि एटा और कासगंज से बड़ी संख्या में लोग अयोध्या कूच को निकल पड़े थे।
30 अक्टूबर से पहले ही पुलिस ने प्रमुख कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी शुरू कर दी थी। सबसे पहले कासगंज से 9 प्रमुख कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। जिसमें वे एवं तत्कालीन जिला संघ चालक वैद्य रामाधार जाजू व 7 अन्य लोग थे। उस दिन कासगंज और एटा में 40 गिरफ्तारियां हुईं। सभी को मैनपुरी की जेल में बंद किया गया। उन्होंने बताया कि मैनपुरी की जेल में 350 प्रमुख नेताओं के साथ कारसेवक बंद रहे।
इसके बावजूद प्रतिबंधों को धता बताकर तमाम कारसेवक अयोध्या पहुंच गए। 2 नवंबर को कारसेवकों पर गोलियां बरसाई गईं। जिसमें तमाम कारसेवक शहीद हुए। इस हत्याकांड से समाज में आक्रोश फैल गया और लोग गिरफ्तारी देने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े। महिलाओं ने बच्चों सहित गिरफ्तारियां दीं। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण को लेकर पूरी दुनिया का हिंदू समाज प्रसन्न है।