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सरकार को संघ की सलाह- मंत्री, सांसद और विधायकों के कामों की कराएं निगरानी

Wed, 31 Jul 2019 12:10 AM IST
मुकेश कुमार पुनीत शर्मा, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
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संघ प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चाहता है कि केंद्र और राज्य सरकारें सभी जनप्रतिनिधियों के कार्यों की नियमित निगरानी कराएं। कम से कम हर छह माह का एक रिपोर्ट कार्ड तैयार हो। मंत्री, सांसद और विधायक पब्लिक के बीच कितना जा रहे हैं। 
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जनता उनके व्यवहार से खुश है या नहीं इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए सभी का आंकलन किया जाना चाहिए। इससे यह भी पता चल जाएगा कि हम कहां और कितने कमजोर हैं। किस क्षेत्र में अधिक सुधार की जरूरत है।

वृंदावन में 27 और 28 जुलाई को हुई सामाजिक सद्भाव बैठक में देश भर से संघ के प्रतिनिधि पहुंचे थे। कई राज्यों के प्रतिनिधियों का कहना था कि कुछ जगह पब्लिक जनप्रतिनिधियों के व्यवहार से भी खुश नहीं है। कहीं कहीं जनप्रतिनिधि ही बिगड़ते सामाजिक सद्भाव की वजह बन रहे हैं। 
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जनता के बीच नहीं गए नेता

आरोप लगते हैं कि वो अपने समाज से जुड़े लोगों को ज्यादा तवज्जो देते हैं, जबकि चुनाव में सभी ने उनका साथ दिया था। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, झारखंड, केरल, पंजाब समेत कई राज्यों के प्रचारकों ने यह मुद्दा उठा मन लोगों का कहना था कि कुछ सीटों पर तो जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद पब्लिक के बीच गए ही नहीं हैं। 

अगर कोई समस्या लेकर जाता है तो कह दिया जाता है कि वह बाहर गए हैं। इससे भी लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। कुछ राज्यों के प्रचारकों का कहना था कि कुछ जिलों में जनप्रतिनिधियों ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि जातियों में टकराव की स्थिति बन जाती है। 

बैठक में कहा गया कि सरकारों को चाहिए कि वह अपने जनप्रतिनिधियों के कार्यों की निगरानी कराएं। जहां भी शिकायतें मिलें वहां के सांसद या विधायकों को बैठाकर बात की जाए। लोगों के बीच जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी से जनता का जुड़ाव बना रहता है। 
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जो नाराजगी भी होती है वह दूर हो जाती है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव के लिए सभी को काम करना चाहिए। जनप्रतिनिधियों का पब्लिक से जुड़ाव होता है लिहाजा उन्हें पूरी ताकत के साथ इस विषय पर काम करने की जरूरत है।

जनप्रतिनिधि किसी जाति वर्ग के नहीं सबके होते हैं

संघ के प्रचारकों का कहना था कि जनप्रतिनिधि किसी जाति वर्ग के नहीं बल्कि जनता के होते हैं। लिहाजा उन्हें कुछ ही लोगों के बीच में नहीं सिमटना चाहिए। हर वर्ग में जाकर उनकी बात सुनें। ग्राम पंचायत स्तर पर चौपाल लगाकर पब्लिक से बात की जाए। हर समस्या का समाधान हो। 
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