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Agra News: उत्तरी बाईपास पर 400 करोड़ खर्च फिर भी शहर में दौड़ रहे यमदूत

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नेशनल हाईवे फाइल फोटो - फोटो : samvad
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आगरा। शहर के बीचोंबीच से गुजरे राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-19) पर भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। टोल और महज चार किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी बचाने के चक्कर में ये वाहन हादसाें का सबब बन रहे हैं। हादसों में लोगों की जान जा रही है। निदान के लिए 400 करोड़ रुपये की लागत से उत्तरी बाईपास बना लेकिन स्थिति जस की तस है।
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इस गंभीर मसले पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) को नोटिस जारी किया। साथ ही सुनवाई की अगली तारीख 25 नवंबर तय की है।
बदहाल ट्रैफिक और जानलेवा बनता हाईवे
राष्ट्रीय राजमार्ग-19 घनी आबादी के बीच से निकलता है। दोनों ओर आवासीय कॉलोनियां, स्कूल, अस्पताल, बाजार और ऐतिहासिक स्मारक हैं। सिकंदरा, खंदारी, भगवान टॉकीज, रामबाग और ट्रांस यमुना जैसे क्षेत्रों में भारी वाहनों के साथ स्थानीय यातायात भी चलता है। ऐसे में तेज रफ्तार ट्रकों और कंटेनरों का आवागमन दुर्घटनाओं का गंभीर कारण बन रहा है। सिकंदरा से लेकर एत्मादपुर तक कई लोगों की जान जा चुकी है। सिकंदरा, गुरुद्वारा गुरु का ताल, भगवान टाॅकीज फ्लाईओवर, वाटरवर्क्स, रामबाग पर जाम की समस्या से लोग परेशान हो रहे हैं।
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बेअसर साबित हो रहा बाईपास
400 करोड़ रुपये की लागत से बने 14 किलोमीटर लंबे उत्तरी बाईपास पर 4 दिसंबर 2025 से आवागमन शुरू हुआ था। यह बाईपास यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़कर 38 किलोमीटर का वैकल्पिक मार्ग देता है। अगर वाहन एनएच से शहर के बीच से गुजरते हैं, तो उन्हें लगभग 34 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। वहीं, उत्तरी बाईपास का उपयोग करने पर भारी वाहनों को मात्र चार किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी और वे शहर के जाम से भी बच जाएंगे। मगर, उत्तरी बाईपास और यमुना एक्सप्रेसवे पर टोल चुकाना पड़ता है। इसी मामूली टोल और थोड़े से ईंधन को बचाने के लिए ट्रांसपोर्टर शहर के भीतर से वाहन निकालते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में उठी मांगें
जनहित याचिका में मांग की गई है कि जिन व्यावसायिक वाहनों का आगरा में कोई गंतव्य नहीं है, उन्हें शहर के भीतर एनएच-19 से गुजरने के बजाय उत्तरी बाईपास और यमुना एक्सप्रेसवे से जाना अनिवार्य किया जाए। इस संबंध में तत्काल आधिकारिक अधिसूचना जारी हो और प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट यातायात संकेतक लगाए जाएं। नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। देश के अन्य बाईपास वाले शहरों की तरह यहां भी सख्ती लागू की जाए।
वर्जन :
- 400 करोड़ खर्च कर बाईपास बनाया गया। फिर भारी वाहनों को राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने की अनुमति क्यों दी जा रही है? क्या केवल चार किलोमीटर की दूरी या कुछ टोल बचाने के लिए निर्दोष लोगों की जान जोखिम में डाली जा सकती है? जिन भारी वाहनों का आगरा से कोई संबंध नहीं है, वे शहर के बाहर बने बाईपास का उपयोग करें। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किए हैं। इससे उम्मीद जगी है। - केसी जैन, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट
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