आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध राजकीय व अनुदानित कॉलेजों के प्राचार्योँ की बैठक रविवार को प्रभारी कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में हुई। इसमें कॉलेजों को बताया गया कि रोजगारपरक (वोकेशनल) पाठ्यक्रमों का शुल्क विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से निर्धारित कर दिया गया है। प्रत्येक छात्र को प्रति सेमेस्टर 250 रुपये लिया जाना है। एक वर्ष में अधिकतम 500 रुपये शुल्क लिया जा सकेगा।
शुल्क से रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को भुगतान किया जाएगा। बैठक में प्रभारी कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के साथ कॉलेजों में भी शोध और नवाचार को बढ़ावा देते हुए शैक्षिक उत्कृष्टता प्राप्त करनी है। प्राचार्यों को बताया गया कि सभी के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) का निरीक्षण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। सभी इसकी तैयारियां शुरू कर दें। जो कॉलेज नैक निरीक्षण करा चुके हैं, उनको दूसरे कॉलेजों की मदद करनी चाहिए। उनको नैक निरीक्षण के लिए तैयार करना चाहिए। राजकीय कॉलेजों की ओर से निरीक्षण के लिए दिए जाने वाले शुल्क की व्यवस्था करने में विश्वविद्यालय स्तर से उनकी सहायता की जाएगी।
बैठक में विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. अजय तनेजा, डीन एकेडमिक प्रो. संजीव कुमार, डीन फैकल्टी प्रो. वीके सारस्वत, जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर, प्रो. मनु प्रताप सिंह, प्रो. लवकुश मिश्रा, आगरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग शुक्ल, आरबीएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विजय श्रीवास्तव, बीडी जैन गर्ल्स पीजी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. वंदना अग्रवाल, डॉ वीके सिंह, डॉ. निर्मला यादव सहित करीब 35 कॉलेजों के प्राचार्यों की उपस्थिति रही।
प्रभारी कुलपति ने प्राचार्यों से कहा कि कॉलेज अपनी बेस्ट प्रैक्टिसेज (सर्वोत्तम प्रथाओं) पर ध्यान केंद्रित करें। नैक के निरीक्षण में इसे देखा जाता है। साथ ही प्रत्येक कॉलेज अपने यहां नवाचार और ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल का गठन करें। कॉलेजों में पढ़ाने वाले उन संविदा शिक्षकों को कॉलेज के विकास कार्यों में आगे लाने के लिए प्रेरित करने के लिए कहा, जिनका चयन विधिवत रूप से चयन समिति के माध्यम से किया गया है।
राजकीय और एडेड कॉलेजों में गिर रही छात्र संख्या को प्रभारी कुलपति ने चिंता का विषय बताया। उन्होंने छात्रों की जरूरत के अनुसार नए स्ववित्त पोषित (सेल्फ फाइनेंस वाले) पाठ्यक्रमों को संचालित किए जाने पर जोर दिया। कहा कि, आने वाले 20 वर्षों में जैसे-जैसे नए विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ती जाएगी, हमें अपने अस्तित्व की रक्षा करने के लिए उत्कृष्ट श्रेणी के और उच्च मानदंड वाले पाठ्यक्रमों की जरूरत होगी।