शादी के इस सीजन में दुल्हनों के मन को राजवाड़ा लहंगा खूब भा रहा है। मोती, शीशे, जर्किन, पर्ल, डोरी वर्क, नल्की, फिगर आर्ट, जरदोजी, सिल्क प्रिंट, पोजिशन आर्ट से तैयार ये लहंगे रजवाड़ा अंदाज में नजर आ रहे हैं। इनकी कीमत भी अच्छी खासी है।
सहालग के बाजार में डिजाइनर लहंगे सज गए हैं। पारंपरिक परिधानों में एक बार फिर इंद्रधनुषी रंगों का चलन लौट आया है। यह शानदार मल्टीकलर लहंगा चोली सेट फैशन में खूब बिक रहा है। यह लहंगा किसी भी संगीत, हल्दी या विवाह समारोह के लिए एकदम सही है।
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दुल्हनों में रजवाड़ा, तथास्तु और पोजिशन प्रिंट लहंगे की सबसे ज्यादा मांग है। आज की पीढ़ी शाही अंदाज वाली शादियों को प्राथमिकता दे रही है। रजवाड़ा लहंगा 35 हजार, तथास्तु लहंगा 10 से 15 हजार, पोजिशन प्रिंट 15 हजार, बनारसी 4000 से शुरू हैं।
इस बार रजवाड़ा लहंगे को खूब पसंद किया जा रहा है। दुल्हनों को यह भा रहा है। इसके पीछे का कारण है लहंगे में बनने वाला घेर। इससे लहंगों का 10 गुना आकर्षण बढ़ जाता है। मुख्य परिधान के साथ संतुलन बनाने के लिए चमकीले गुलाबी रंग में रखा गया है। चुनरी व चोली में रंग-बिरंगी बीट्स का उपयोग किया गया है जिससे यह और भी खूबसूरत बनता है। इसमें मोती, शीशे, जर्किन, पर्ल, डोरी वर्क, नल्की, फिगर आर्ट, जरदोजी, सिल्क प्रिंट, पोजिशन आर्ट से तैयार किया गया है। बाजार में इनकी कीमत 35 हजार से एक लाख रुपये तक है। यह सिर्फ एक परिधान नहीं, बल्कि राजस्थानी शिल्प और कला का जीता जागता उदाहरण है, जिसे आधुनिक ट्रेंड्स को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है।
लहंगे में है खास
लहंगे की खूबसूरती और वॉल्यूम को देखते हुए इसके लिए आर्ट सिल्क व हल्का सिल्क, मिश्रित कपड़े का उपयोग किया गया है। इन कपड़ों में शानदार चमक और अच्छा घेर होता है जो लहंगे को एक राजसी लुक देता है। चुनरी हल्के नेट और शिफॉन फैब्रिक की है। लहंगे के साथ संतुलन बनाने के लिए चमकीले रंग में रखा गया है। लहंगे में रानी पिंक, केसरिया, पीला और टील जैसे विपरीत रंगों को एक सीध में ढाला है। पैचवर्क, एम्ब्रॉयडरी वाली चोली और चमकीली हल्के रंग की चुनरी बेहद आकर्षित लग रही है।
रंग- बिरंगे डिजाइन
लहंगे में अलग-अलग रंगों और लंबी सीध में प्रिंट का उपयोग किया गया है। प्रत्येक पैनल में एक अलग पारंपरिक प्रिंट या पैटर्न है जिससे यह अन्य लहंगों से अलग दिखाई पड़ता है।
जरी और गोटा पट्टी का काम
लहंगे के निचले किनारे पर एक चौड़ी और जरदोजी और गोटा पट्टी की बॉर्डर है। सुनहरे धागे का यह काम लहंगे को चमकदार बनाता है।
बारीक धागे की कढ़ाई
चोली और लहंगे के पैनलों पर बारीक रेशम के धागे की कढ़ाई की गई है। जो घेर को उभारती है।