आगरा एसटीएफ और मुंबई अपराध शाखा की टीम ने हरियाणा के जिला झज्जर स्थित मछरौली से मुख्य शूटर दीपक, सनी, सोनू, रितिक जबकि विष्णु कुशवाहा को गांव बिजौली से गिरफ्तार किया। वहीं जतिन भारद्वाज इटावा और विशाल गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके से पकड़े गए। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि घटना के पीछे मकसद दहशत फैलाना था। इससे गिरोह रंगदारी वसूल करता। इस काम को विष्णु कुशवाहा ने अंजाम दिया था।
विष्णु का संबंध लाॅरेंस बिश्नोई गिरोह के श्रीगंगानगर, राजस्थान में पांच करोड़ की रंगदारी मांगने वाले शुभम लोनकर के साथी गोलू पंडित से है। गोलू पंडित को श्रीगंगानगर में गोली चलाने के एवज में धनराशि मिली थी। लॉरेंस बिश्नोई और शुभम लोनकर गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम पर महिमामंंडित करने वाले कई एकाउंट चलाता है। इनको देखकर ही आरोपियों ने भी अपराध की दुनियों में कदम रखा।
रेकी के बाद घटना को दिया अंजाम
एसटीएफ की पूछताछ में पता चला कि विष्णु, रितिक, दीपक सोनू, जतिन और विशाल मुंबई गए थे। उन्होंने कई दिन तक रेकी की थी। यह देखा था कि कब घटना करनी है। कहां से आना है और कहां भागना है। कई बार रेकी करनी पड़ी थी। 31 जनवरी की रात गिरोह ने सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल उपलब्ध कराई थी। इसी से फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। रेकी और घटना में 12 से अधिक सहयोगी शामिल थे।
पुलिस कार्रवाई की लेते रहे जानकारी
आरोपी घटना को अंजाम देने के बाद अलग-अलग भागे थे। विष्णु गुजरात में रहने वाले अपने भाई के पास चला गया था। उसका भाई मजदूरी करता है। वह पुलिस की कार्रवाई की सारी जानकारी सोशल मीडिया और इलेक्ट्राॅनिक मीडिया के माध्यम से प्राप्त कर रहे थे। उसी के अनुसार पुलिस से बचने के लिए अपना स्थान भी बदल रहे थे। पूछताछ में जतिन भारद्वाज व विशाल ने बताया कि दीपक और उसके साथियों के रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग करने की पूरी जानकारी उन्हें भी थी। उन्होंने आरोपियों के रहने और खाने का प्रबंध किया था।
स्थानीय पुलिस को ऑपरेशन की भनक नहीं
फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर पर पांच राउंड फायरिंग कर दहशत फैलाई गई थी। एक गोली उनके जिम के शीशे में लगी थी। घटना की जिम्मेदारी लॉरेंस विश्नोई गैंग के सदस्य शुभम लोनकर ने ली थी। फायरिंग के पीछे मकसद रंगदारी वसूलना था। पांच आरोपी मामले में पहले पकड़े गए थे। उनसे पूछताछ के बाद मुंबई अपराध शाखा ने यूपी एसटीएफ से संपर्क किया था। हरियाणा एसटीएफ को भी ऑपरेशन में शामिल किया गया। कार्रवाई बेहद गोपनीय रखी गई। स्थानीय पुलिस को भी इसकी भनक नहीं लगी। गिरफ्तारी के बाद थाना पुलिस को सूचित किया गया।