आगरा हस्तशिल्प उद्योग पर आर्थिक संकट के बादल गहरा रहे हैं। वैश्विक बाजार में पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रहे इस सेक्टर पर अब निर्यात उत्पादों पर शुल्कों और करों की छूट (रोडटेप) में की गई कटौती से झटका लगा है। निर्यातकों का कहना है कि यह निर्णय न केवल विदेशी ऑर्डर को प्रभावित करेगा, बल्कि आगरा के हजारों कारीगरों की आजीविका पर भी सीधा प्रहार है।
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स्टोन और अन्य हस्तशिल्प निर्यातक इसे दोहरी मार बता रहे हैं। एक ओर अमेरिकी बाजार में ड्यूटी टैरिफ की अनिश्चितता के कारण करोड़ों रुपये के ऑर्डर अधर में हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन को आधा कर दिया है। हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट प्रमोशन कौंसिल की प्रशासनिक समिति के सदस्य रजत अस्थाना ने बताया कि सरकार को संकट के इस दौर में मदद बढ़ानी चाहिए थी, लेकिन इसके उलट मिलने वाली मामूली राहत को भी कम कर दिया गया है। स्टोन हैंडीक्राफ्ट पर पहले मिल रहे 1.2% के इंसेंटिव को घटाकर अब बेहद कम कर दिया गया है। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर होगी, जिससे चीन और वियतनाम जैसे देशों को बढ़त मिल सकती है।
शिपमेंट रुके, मार्जिन न्यूनतम स्तर पर
हस्तशिल्प कारोबारियों का कहना है कि अमेरिका द्वारा ड्यूटी टैरिफ पर अंतिम फैसला न लिए जाने के कारण बड़े शिपमेंट रुके हुए हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और ऊंचे लॉजिस्टिक खर्च (माल ढुलाई) के कारण निर्यात मार्जिन पहले ही न्यूनतम स्तर पर है। आगरा में हस्तशिल्प से लगभग 1.5 लाख कारीगर सीधे जुड़े हैं और यहां से सालाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का निर्यात होता है।
सरकार करे जल्द हस्तक्षेप
हस्तशिल्प निर्यातक शीनू ने कहा कि यह निर्णय केवल व्यवसाय का नहीं, बल्कि उन हजारों कारीगरों के भविष्य का है जिनका घर निर्यात ऑर्डर्स पर चलता है। अगर सरकार ने जल्द हस्तक्षेप कर राहत नहीं दी, तो वैश्विक बाजार में हमारी पकड़ कमजोर हो जाएगी।— ,
ये पड़ेगा प्रभाव
- आजीविका पर संकट बढ़ेगा। उत्पादन घटने का सीधा असर रोजगार पर पड़ेगा।
- लागत में वृद्धि होगी। कच्चा माल और लॉजिस्टिक खर्च बढ़ जाएगा।
- प्रोत्साहन घटने से विदेशी खरीदारों के लिए भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे।