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म्युजिक की महफिल, नाच उठे लोग

Tue, 24 Feb 2015 01:56 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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रंग-बिरंगी लेजर लाइटें। हाई वोल्टेज साउंड। गिटार, ड्रम के साथ वेस्टर्न म्यूजिक की धुन पर थिरकते युवा। कुछ ऐसा ही माहौल था ताज महोत्सव में सोमवार की रात। शिल्पग्राम में एक नहीं, बल्कि तीन-तीन रॉक बैंड परिक्रमा, देस परदेश और मृगया की धुनों पर श्रोता नाच उठे। इससे पहले वे यहीं शास्त्रीय संगीत, भजन और नृत्य का आनंद ले रहे थे।
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ताजनगरी में बैंड की धुनों के दीवानों ने सोमवार रात ताज महोत्सव का रुख किया। सबसे पहले अदिति श्रीवास्तव के बैंड देस-परदेश की प्रस्तुति हुई। इसके बाद रजत कक्कड़ के बैंड मृग्या ने कबीर के दोहों, सूफी और राक खमाज के साथ राक का फ्यूजन पेश किया। अंत में कलाकारों ने दमादम मस्त कलंदर.. पर लोगों को झुमा दिया। फिर युवा मुक्ताकाशीय मंच की ओर खिंचे चले आए। साढ़े 11 बजे के बाद सुबीर मलिक के परिक्रमा बैंड की बारी आई। मुख्य गायक निखिल मलिक ने वेस्टर्न धुनों पर प्रस्तुति दी। हालांकि तब कद्रदान कम थे, लेकिन जो थे, पूरे जोश में थे। बैंड ने धुनें छेड़ीं तो संगीतप्रेमी खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। बता दें, परिक्रमा 1991 से दुनिया भर में प्रस्तुति दे रहा है। इस बैंड ने इन 24 सालों के सफर में बालीवुड संगीत से दूरी बनाए रखी है। बैंड के मुख्य गायक नितिन मलिक यह भी कहते हैं कि बालीवुड संगीत  कमतर नहीं है। शायद यही कारण है कि कि 9 सदस्यीय बैंड ने हाल में ही प्रदर्शित फिल्म मंजूनाथ में संगीत देने को राजी हुआ। बैंडसदस्यों के मुताबिक फिल्म का यथार्थवाद उन्हें भा गया था। आकांक्षा समिति की अध्यक्ष संगीता भटनागर और पक्षालिका सिंह ने दोनों बैंड को स्मृति चिह्न भेंट किए।

रॉक बैंड्स से पहले महोत्सव में प्रियंका, नमन जैन ने नृत्य पेश किया तो मनोज शर्मा, लाल जी, सुदेश हरिदास, सलीम खान, मधुकर चतुर्वेदी, रवींद्र तलेगांवकर ने ताल संगम और सुचि उपाध्याय ने भजन प्रस्तुत किए।
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