एटा। हादसों पर अंकुश लगाने के लिए परिवहन निगम ने जनपद की रोडवेज बसों के लिए नई टैग लाइन ‘अपनी बस अपना मार्ग’ शुरू की है। इसके तहत चालक को उसकी सहूलियत के हिसाब से रूट और बस दी जाएगी। ताकि चालक आराम और राहत महसूस कर सकें और हादसों पर अंकुश लगे।
आगरा हादसे की मुख्य वजह चालक की झपकी लगना सामने आई थी। हादसे में 29 लोगों की जान गई। मामले का सीएम से लेकर पीएम तक संज्ञान लिया गया। ऐसी ही एक पहल एटा रोडवेज के अधिकारियों की ओर से भी शुरू की गई है। इसमें सबसे ज्यादा ध्यान चालक की सहूलियत पर दी गई है। चालकों से आए दिन थकान और अधिक लोड लेने के चलते हादसे हो रहे थे। इसे देखते हुए चालकों को बसों और रूट पर सहूलियत दिए जाने का निर्णय लिया है। इसमें चालकों से उनके पसंदीदा रूट के बारे में जानकारी ली जाएगी। इसके बाद पूरे एक माह के लिए उन्हें ऐसी बस दी जाएगी जो लंबे रूट पर जाने के लिए एकदम दुरुस्त हो। बसों में रिफ्लेक्टिव टेप लगाए जाएंगे।
आंकड़ों पर नजर
डिपो के पास बसें- 122
अनुबंधित बसें - 42
स्थायी चालक - 82
संविदा कर्मी चालक - 200
स्थाई परिचालक - 65
संविदा कर्मी परिचालक- 292
हादसों पर एक नजर
छह माह में हुए हादसे- 14
जान गंवाने वाले यात्री- 02
घायल यात्रियों की संख्या - 14
आगरा हादसे के बाद परिवहन निगम के उच्चाधिकारियों की ओर से कई आदेश जारी हुए हैं। हादसों को रोकने लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अपनी बस अपना मार्ग टैग लाइन से चालकों को खासी सहूलियत मिलेगी और वह पूरे मन और बिना थकान के यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचा सकेंगे। लंबे रूट पर दो चालकों को भेजने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी गई है। मदन लाल, एआरएम, एटा
अब तीन श्रेणियों में होगा रोडवेज बसों का प्रबंधन
कासगंज। एक सप्ताह पूर्व यमुना एक्सप्रेस वे पर हुए भीषण बस हादसे के बाद रोडवेज ने व्यवस्थाओं में सुधार के लिए पहल शुरू कर दी है। अब रोडवेज बसों की तीन श्रेणियों का निर्धारण होगा। इन श्रेणियों के आधार पर ही बसों का संचालन किया जाएगा।
बसों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटकर संचालन किया जाएगा। इसके लिए मानक भी तय किए गए हैं। बसें कितने किलोमीटर चली हैं उसके आधार पर श्रेणी का निर्धारण होगा और चालक परिचालक की ड्यूटी। यूपी रोडवेज के एमडी धीरज साहू ने बसों के संचालन के लिए निर्धारित की गई श्रेणियों की जानकारी डिपो प्रशासन को भी भेजी है। जिससे लिए गए निर्णय पर शीघ्र अमल शुरू हो सके। जिले में रोडवेज के पास अपनी 66 बसें हैं। इनमें कई बसें काफी पुरानी भी हैं।
अलॉटमेंट सॉफ्टवेयर से लगेगी ड्यृूटी
रोडवेज के चालक परिचालकों की ड्यूटी लगाने में अब मनमानी का खेल नहीं चल सकेगा। इसके लिए अलॉटमेंट सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है। इसी सॉफ्टवेयर के जरिए ड्यूटी लगेगी। जो चालक परिचालक अक्षम होंगे उनकी ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी।
ऐसे होगा श्रेणी का निर्धारण
ए श्रेणी-इस श्रेणी में उन बसों को रखा जाएगा जो चार लाख किलो मीटर से कम चली होंगी। इन बसों पर अनुभवी चालक परिचालकों की ड्यूटी लगेगी। ड्यूटी लगाते वक्त पुराने ट्रैक रिकार्ड की भी जांच होगी।
बी श्रेणी- इसमें चार लाख किमी से अधिक चलने वाली बसों को रखा जाएगा।
सी श्रेणी-इसमें लोकल रूटों पर चलने वाली बसों को रखा जाएगा।
बसों के संचालन के लिए श्रेणी के निर्धारण के लिए मिले निर्देशों के आधार पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। जल्द ही इस व्यवस्था के तहत बसों का संचालन शुरू हो जाएगा। ब्रजेश कुमार डिपो प्रभारी