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Agra: सड़क ऐसी खोखली बनाई, सालभर में गड्ढों में समाई; 318 करोड़ के सीवर प्रोजेक्ट से एक भी रोड चलने लायक न बची

Wed, 10 Apr 2024 04:00 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

सड़क ऐसी खोखली बनाई कि सालभर में गड्ढों में समा गई। 318 करोड़ के सीवर प्रोजेक्ट करे चलते एक भी रोड चलने लायक नहीं बची है। हर रोड में गड्ढे हो गए हैं। 
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Agra: सड़क ऐसी खोखली बनाई, सालभर में गड्ढों में समाई - फोटो : संवाद
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा में बनाई जा रही सड़कों की गुणवत्ता इतनी खराब है कि बनने के कुछ दिन में ही गड्ढों में समा रही है। खबर में लगा यह फोटो हरीश नगर, नारायण विहार और मनहर गार्डन के सामने वाली 80 फुट रोड का है। इसका निर्माण वर्ष 2021 में किया था। उसके पास का दूसरा चित्र भी उसी सड़क का और उसी जगह का है, लेकिन महज एक साल बाद का। हैरान रह गए न आप।

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एक किमी से ज्यादा लंबी अमल गार्डन-फूड सर्किल रोड का यह बुरा हाल जलनिगम ने किया है। इसने वेस्टर्न जोन सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत यहां सीवर लाइन ऐसी बिछाई कि पूरी सड़क गड्ढों में समा गई है। 318 करोड़ रुपये की लागत से जलनिगम ने वेस्टर्न जोन सीवर प्रोजेक्ट में मिट्टी का कॉम्पेक्शन हुए बिना ही ऐसी सड़क बनाई जो अंदर खोखली ही रही। पश्चिमपुरी से लेकर बोदला, लोहामंडी, किशोरपुरा समेत सड़कों का यही हाल है।

बच्चे हो रहे दुघर्टनाओं में चोटिल

अमल गार्डन से फूड सर्किल तक सीवर लाइन के लिए खोदी गई ट्रेंच में सड़क बनाई, लेकिन खोखली होने से एक साल में ही गड्ढों में समा गई। अब गड्ढों से भरी सड़क पर सेंट फ्रांसिस स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, गायत्री पब्लिक स्कूल, लाइफ लाइन इंटर कॉलेज, चिल्ड्न प्रोग्रेसिव स्कूल, हिलमैन स्कूल समेत 10 से ज्यादा स्कूलों के 25 हजार से ज्यादा बच्चे निकलते हैं, जो साइकिल और स्कूटर के फिसलने से चोटिल हो रहे हैं।
 

शिकायत पर छह फरवरी को दी फर्जी रिपोर्ट

क्षेत्र के लोगों ने घटिया सीवर लाइन डालने की शिकायत की, जिस पर जलनिगम के प्रोजेक्ट मैनेजर स्वतंत्र सिंह ने मौजूदा गड्ढों की जगह एक साल पहले बनाई गई सड़कों के फोटो लगाए। गड्ढों के लिए जलनिगम इंजीनियर ने नाले के ऊंचे होने की जिम्मेदारी बताई, जबकि यही सड़क दूसरी लेन पर ठीक है, जहां सीवर लाइन नहीं बिछाई गई। सड़क निर्माण के पुराने फोटो लगाकरउच्च अधिकारियों को गुमराह किया गया।
 

ये है सीवर लाइन के ऊपर सड़क निर्माण का तरीका

लोक निर्माण विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर राकेश कुमार के मुताबिक सीवर लाइन बिछाने के कारण पाइप और ट्रेंच में मिट्टी जमा होने से रह जाती है। इसके लिए पाइप डालने के बाद आठ से नौ इंच मिट्टी डाली जाती है और उसमें पानी चलाया जाता है, ताकि मिट्टी सेट हो जाए। फिर रोलर चलाकर मिट्टी दबानी होती है। 

यही प्रक्रिया पूरी ट्रेंच में हर आठ इंच मिट्टी डालने के बाद अपनानी होती है। उसके बाद बारिश के सीजन में इसे जीएसबी डालकर छोड़ दिया जाता है ताकि बारिश का पानी रिसकर सड़क में मिट्टी का कॉम्पेक्शन बेहतर कर दे। अगर बार बार सड़क धंस रही है तो नियमों का पालन नहीं किया गया होगा।
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जिसकी जिम्मेदारी वह दुरुस्त कराए

यह सड़क बहुत खराब स्थिति में है, मैं खुद भुक्तभोगी हूं। जलनिगम और एडीए, जिसकी भी जिम्मेदारी हो, वह इसे चलने लायक बनाए। इस मामले में मैं मंडलायुक्त से बात करुंगा। विभाग के इंजीनियरों की गलती की सजा लोग नहीं उठाएंगे। जिसकी जिम्मेदारी है, वह विभाग सड़क जरूर बनाएगा। -पुरुषोत्तम खंडेलवाल, विधायक, आगरा उत्तर
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