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कम बारिश से धान की फसल पर मंडरा रहा खतरा

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बारिश न होने से सूख रही मक्का की फसल - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। मौसम की बेरुखी से अब धान की फसल पर खतरा मंडराने लगा है। बारिश न होने से किसानों के साथ-साथ अब विशेषज्ञों को भी धान की पैदावार प्रभावित होने की चिंता सता रही है। बारिश के आंकड़े इस चिंता को और बढ़ा रहे हैं।
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जुलाई के 18 दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिले पर अब तक मानसून मेहरबान नहीं हो सका है। हाल यह है कि दिन में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक बना रहता है तो रात में पारा 28 डिग्री तक रहता है। इससे धान की फसल को ठंडक नहीं मिल पा रही है। बड़े पैमाने पर जिले में धान की खेती होने के चलते किसानों के लिए निजी संसाधनों से भी सिंचाई आसान नहीं है।
पिछले तीन वर्षों में जुलाई माह में हुई बारिश की अगर तुलना करें तो पता चलता है कि जिले में बीते वर्षों के सापेक्ष पांच प्रतिशत भी बारिश नहीं हुई है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास रंजन चौधरी बताते हैं कि अब तक धान के लिए कम से कम तीन से चार बार बारिश हो जानी चाहिए थी। इससे तापमान 30 डिग्री के करीब आ जाता और धान की फसल का विकास भी होता है। किसानों को भी इसी बात की चिंता सता रही है। वहीं दूसरी और निजी संसाधनों से सिंचाई करने पर भी उन्हें अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
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कब कितना बरसा पानी
- 347 मिमी जुलाई 2018 में हुई बारिश
- 153 मिमी जुलाई 2019 में हुई बारिश
- 06 मिमी जुलाई 2020 में अब तक हुई बारिश
- 65 हजार हेक्टेयर है धान का कुल क्षेत्रफल
बारिश की फिर जगी उम्मीद
मौसम के पूर्वानुमान से एक बार फिर बारिश की उम्मीद जगी है। कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र कुमार वर्मा ने 19 जुलाई को बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। इसमें घने बादलों के साथ तेज बारिश होने की बात कही गई है। वहीं 23 जुलाई तक बादल और बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। लेकिन पूर्व में कई बार पूर्वानुमान सटीक न बैठने से लोग महज इंतजार कर रहे हैं।
बढ़ती जा रही समस्या
जिले में बडे़ पैमाने पर धान की खेती की जाती है। इस बार बारिश न होने से किसानों को रोपाई में भी परेशानी हुई। अब बारिश न होने से ये समस्या बढ़ती जा रही है। लेकिन इसमें कुछ भी किया नहीं जा सकता है।
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डॉ. गगन दीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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