आजाद घूम रहा किसान की मौत का जिम्मेदार
किसान की खुदकुशी का मामला बनता जा रहा राजनीतिक खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। गांव औडेन्य निवासी किसान कामेंद्र की मौत का जिम्मेदार खुला घूम रहा है। पुलिस पकड़ना तो दूर तलाश के नाम भी खानापूरी कर रही है। चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन घटना को लेकर खामोशी छाई हुई है। किसान की खुदकुशी मामले में अब राजनीतिक खेल भी शुरू हो गया है।
कोतवाली क्षेत्र के गांव औडेंय निवासी किसान कामेंद्र उर्फ मुन्ना ने बृहस्पतिवार को गोली मारकर खुदकुशी कर ली। अपने सुसाइड नोट में लिख कर उसे खुदकुशी के दोराहे पर लाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की गुहार भी लगाई। लेकिन शायद मृतक किसान कामेंद्र को न्याय नहीं मिल सकेगा। घटना के बाद से ही पुलिस खामोश है। मामले में राजनीतिक खेल शुरू हो चुका है। सूत्रों का कहना है कि जिस जमीन की वजह से कामेंद्र ने अपनी जान दी है। उस जमीन के सच के पीछे कई सफेदपोश लोगों के नाम छिपे हैं। ऐसे में पुलिस भी कार्रवाई और गिरफ्तारी के नाम पर सिर्फ हाथ पर हाथ धरे बैठी है। बात करें न्याय की तो घटना के चार दिन बाद भी आरोपी खुला घूम रहा है। न तो कोई राजनीतिक पार्टी न्याय दिलाने के नाम पर आगे आई है। न हीं कोई समाज का ही व्यक्ति आगे बढ़ कर आया है। ऐसे में भला किसान कामेंद्र को न्याय कैसे मिलेगा। इस पर संशय बढ़ता जा रहा है। इस घटना के बाद कोई कार्रवाई न होने से से तो लगता है एक किसान की जान शासन और सत्ता के लिए कोई मायने नहीं रखती।
एक जमीन के छह हिस्सेदार
सूत्रों के अनुसार मामला शहर के आगरा बाईपास रोड पर बेशकीमती जमीन से जुड़ा है। इसमें एक राजनीतिक रसूखदार की अहम भूमिका है। जमीन के छह हिस्सेदार है, जिनमें से कामेंद्र उर्फ मुन्ना भी एक हिस्सेदार थे। उनकी जमीन बिक्री भी हो गई लेकिन हिसाब किताब नहीं हुआ। इस कारण से कामेंद्र को खुदकुशी करनी पड़ गई। इस मामले की अगर गंभीरता से उच्च स्तरीय जांच हो तो कई सफेदपोश लोगों के चेहरे सामने आ सकते हैं।