झुग्गियों में पहुंचा रहीं शिक्षा की रोशनी
महताब बाग के पीछे इंद्रानगर की झुग्गी बस्ती में रहने वालीं मीनाक्षी, संध्या और रेखा धूलियागंज के एक इंटर कॉलेज में 12वीं की छात्रा हैं। वह खुद तो पढ़ ही रही हैं, साथ ही झुग्गियों में शिक्षा की रोशनी भी फैला रही हैं। कोरोना काल में छोटे बच्चों के स्कूल खुले नहीं और झुग्गी वाले बच्चों के पास ऑनलाइन पढ़ने के लिए मोबाइल नहीं थे।
इन्होंने इस समस्या को देखा तो उन्हें खुद ही पढ़ाना शुरू कर दिया। पहले छह बच्चे आए और फिर बढ़ते-बढ़ते संख्या 60 तक पहुंच गई। अब रोज पाठशाला लगती है। बस्ती के लोग इन्हें अब मैडम कहने लगे हैं। मीनाक्षी का कहना हैं कि एक दूसरे की मदद से ही समाज चलता है। भगवान ने हमें इस काबिल बनाया कि हम किसी को पढ़ा सकें तो क्यों न पढ़ाएं। शिक्षा बांटने से बढ़ती है।
ऊषा ने गरीब बच्चों के लिए खोली लाइब्रेरी
ऊषा पाल ने नरायच के सत्य नगर सामुदायिक केंद्र में गरीब बच्चों के लिए लाइब्रेरी की शुरूआत की। पे बैक टू सोसाइटी के सिद्धांत पर चल रहीं देशज फाउंडेशन की ट्रस्टी ऊषा पाल ने सावित्री बाई फुले स्मृति पब्लिक लाइब्रेरी के जरिए नरायच के गरीब बच्चों को अच्छी पुस्तकों के जरिए शिक्षा देने की पहल की।
उन्होंने दिवाली से पहले 14 अक्तूबर को लाइब्रेरी की शुरूआत कराई। ऊषा पाल की इस पहल से नरायच के आसपास की बस्ती और सत्य नगर में बच्चों को अच्छी किताबें पढ़ने को मिल रही हैं। ऊषा पाल के मुताबिक इस पहल को अन्य बस्तियों में भी किया।
मेरा शहर, मेरी जिम्मेदारी ने संवारी ताजनगरी की दीवारें
26 मार्च 2014 को इंडिया राइजिंग संस्था के जरिए युवा अपने घरों से निकले और हाथों में ब्रश और पेंट लेकर शहर की सड़कों, फ्लाईओवर, दीवारों को आकर्षक रंग में रंगकर सामाजिक संदेश देने की शुरूआत की। क्लीन इंडिया हो या ग्रीन आगरा का संदेश, कलेक्ट्रेट चौराहे के पुल पर मेट्रो हो या गुरुद्वारा गुरु के ताल फ्लाई ओवर पर रंगरोगन, लगातार 350 सप्ताह से इंडिया राइजिंग ने शहर की सड़कों को संवारा है।
चंद युवकों से शुरू हुआ इंडिया राइजिंग का कारवां अब हजारों लोगों को अपने साथ जोड़ चुका है। इंडिया राइजिंग अध्यक्ष आनंद राय के मुताबिक ये हमारा शहर है और इसे संवारना हमारी जिम्मेदारी है। अपनी सामाजिक दायित्वों को हम पूरा कर रहे हैं।
25 हजार से ज्यादा पौधे लगवा दिए
विजय नगर निवासी 62 वर्षीय प्रदीप खंडेलवाल ने केवल खुद पौधे लगाते हैं बल्कि और लोगों को भी पौधरोपण के लिए प्रेरित करते हैं। धरा को हरा भरा बनाने की मुहिम चलाने के लिए उन्होंने ईको क्लब बनाया है। पौधे लगाने की शुरुआत नौ साल पहले पालीवाल पार्क से की। यहां एक वाटिका तैयार की।
इसके बाद शहर की कॉलोनियों में पौधरोपण कराया। आगरा ही नहीं, मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन में भी पौधे लगवा चुके हैं। प्रदीप कहते हैं कि पालीवाल पार्क में दस मिनट भी कोई रहे तो उसे सुकून मिलता है, अगर हम हर कॉलोनी को हरा-भरा कर दें तो लोगों का तनाव बहुत कम कर सकते हैं।