सांयकाल श्वेत वस्त्राभूषण में सजे ठाकुर गोदा रंगमन्नार भगवान गरुण स्तम्भ के समीप विशेष रूप से सजाए गए। जगमोहन में चांदी के चन्द्रप्रभा में विराजित हुए।
शरद पूर्णिमा पर्व पर श्री रामानुज सम्प्रदाय का प्रसिद्ध श्री रंगनाथ मंदिर गीत संगीत की स्वरलहरियों से गुंजायमान हो उठा। धवल चांदनी में श्वेत वस्त्राभूषण धारण किए रजत निर्मित चन्द्रप्रभा पर विराजित ठाकुर गोदा रंगमन्नार के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। शरद पूर्णिमा पर्व पर दक्षिणात्य शैली के प्रसिद्ध श्री रंगनाथ मन्दिर में भी धार्मिक व सांस्कृतिक अनुष्ठानों की धूम मची रही।
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सांयकाल श्वेत वस्त्राभूषण में सजे ठाकुर गोदा रंगमन्नार भगवान गरुण स्तम्भ के समीप विशेष रूप से सजाए गए। जगमोहन में चांदी के चन्द्रप्रभा में विराजित हुए। वेदपाठी विद्वानों द्वारा पुरुष सूक्त, वल्लभस्त्रोत का सस्वर पाठ किया गया। पूर्णिमा के चांद की सीधी रोशनी में विराजे ठाकुर जी की इस अद्भुत छटा को निहारने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
सांस्कृतिक अनुष्ठान की श्रंखला में प्रख्यात नृत्यांगना पदमश्री वैजन्तीमाला के शिष्य श्रीधर वासुदेवन ने अपनी शिष्या कुमारी लक्ष्मी मालाधरन के साथ कर्नाटक संगीत पर आधारित नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्ति संगीत मय बना दिया।