आगरा। पति-पत्नी के रिश्ते अब तेजी से दरक रहे हैं, छोटी-छोटी बातों पर हुए विवाद घरों में नहीं सुलझ पा रहे हैं। इससे विवादों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजाना एक दर्जन से अधिक दंपती परिवार परामर्श केंद्र में अपनी शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
पत्नी अतिरिक्त दहेज की मांग और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाती हैं तो पति आरोप लगाते हैं कि पत्नी घरेलू जिम्मेदारियों को नहीं निभातीं, उनकी बात नहीं मानतीं। यहीं कारण है कि फैमिली कोर्ट में भी मुकदमों की संख्या बढ़ रही है।
सप्ताह में तीन दिन हो रही काउंसलिंग
परिवार परामर्श केंद्र में पहले रविवार को काउंसलिंग होती थी। पिछले कुछ महीनों से विवादों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले रोजाना 5 से 6 दंपती शिकायत करने आते थे, वहीं अब 12 से 15 शिकायतें हर दिन आ रही हैं। 1 जनवरी 2025 से अब तक 3751 शिकायती प्रार्थनापत्र आ चुके हैं। 1084 पहले से लंबित चले आ रहे थे। 1329 में समझौता हो गया। 245 में केस दर्ज करने के आदेश हो गए। 2831 आपसी सुलह व अन्य मामलों के निस्तारण हो गए। 430 शिकायतें अभी लंबित हैं। जिसकी काउंसलिंग चल रही हैं।
केस-1
- जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के एक युवक की शादी 2016 में थाना शाहगंज में हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही दोनों में विवाद होने लगा। कई बार समाज के लोगों ने समझौता कराया। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो पत्नी ने अतिरिक्त दहेज की मांग और मारपीट का आरोप लगाकर परिवार परामर्श केंद्र में शिकायत की। काउंसलर ने दोनों पक्षों को बुलाया। पति ने बात न मानने और अपने माता-पिता से अभद्रता करने का आरोप लगाया। काउंसलिंग के बाद भी बात नहीं बनी।
केस-2
-मलपुरा निवासी युवती की शादी 2020 में मथुरा में हुई थी। शादी के 6 महीने बाद ही विवाद हो गया। बात मारपीट तक पहुंचने पर पत्नी मायके आ गई। पति लेने नहीं आया तो शिकायत की। काउंसलिंग में दोनों ने एक-दूसरे पर मारपीट के आरोप लगाए। पत्नी ने दहेज की मांग पूरी न होने पर उत्पीड़न करने का शिकायती प्रार्थनापत्र दिया था। बात न बनने पर केस दर्ज करने के आदेश दिए गए थे।
कराई जाती है काउंसलिंग
परिवार परामर्श केंद्र की प्रभारी पूनम सिरोही ने बताया कि शिकायती प्रार्थनापत्र के आधार पर दंपतियों की काउंसलिग कराई जाती है। काउंसलिंग टीम में डॉक्टर, साइकोलोजिस्ट, समाजसेवी शिक्षक व अन्य काउंसलर बैठते हैं। तीन से पांच बार काउंसलिंग कराई जाती है। समझौता होने पर फीडबैक लेते रहते हैं। समझौता न होने पर केस दर्ज करने के आदेश दिए जाते हैं।