ताजमहल पर काइरोनोमस कीड़ों के स्राव से हरे रंग की हुईं दीवारों से ‘दाग’ छुड़ाने की कवायद शुरू हो गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक पहुंचे इस मामले में एएसआई की केमिकल ब्रांच ने यमुना किनारे की तरफ की दीवारों पर मडपैक थेरेपी शुरू कर दी है। इसके अलावा मीनारों के बाद आर्च के अंदरूनी हिस्से और दीवारों पर जमा गंदगी हटाने का काम तीन महीने तक चल सकता है।
बता दें कि यमुना नदी में भारी प्रदूषण के कारण 20 अप्रैल से काइरोनोमस कीड़ों का पनपना शुरू हुआ। एएसआई साइंस ब्रांच अधीक्षण पुरातत्वविद केमिकल डा. एम के भटनागर ने सैंपल लेकर इसकी जांच कराई और यमुना में प्रदूषण रोकने तथा मडपैक की सिफारिश की। बाद में यह मामला समाजसेवी डीके जोशी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी उठाया।
अब नम मौसम में हरे दागों की छुड़ाने की कवायद शुरू कर दी है। यमुना किनारे साइंस ब्रांच ने आर्च में पैड लगवाने का काम तेज कर दिया है। ताज की उत्तर पूर्वी और उत्तर पश्चिमी मीनारों के मडपैक के बाद आर्च ही साफ किए जाएंगे। मुख्य गुंबद के बाद संगमरमरी प्लेटफार्म पर भी हरे दागों को छुड़ाने के लिए मडपैक थेरेपी की जाएगी।
प्रदूषण पर रोक जरूरी
एएसआई साइंस ब्रांच के मुताबिक, ताज पर मडपैक स्थाई समाधान नहीं है। अगले साल गर्मी में या अक्तूबर में फिर से कीड़ों का हमला हुआ तो फिर कितनी बार मडपैक कराया जाएगा। डीएम के निर्देश पर बनी एडीएम की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने भी यमुना में प्रदूषण रुकवाने की संस्तुति की थी।