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कागजों में बना रिकॉर्ड, ऑनलाइन दर्ज नहीं हुई फौती

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मैनपुरी। फौती अभियान के तहत आवेदनों का रिकॉर्ड बनाकर प्रशासन ने खूब अपनी पीठ थप-थपाई। शासन से भी इसके लिए खूब शाबाशी मिली लेकिन ये रिकॉर्ड केवल कागजों में ही बना। आज तक 90 प्रतिशत से अधिक स्वीकृत फौती के आदेशों को ऑनलाइन दर्ज नहीं किया जा सकता है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है।
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बीते वर्ष दिसंबर और जनवरी में शासन के आदेश पर फौती दर्ज करने का अभियान चलाया गया था।
इसके तहत जिले की सभी तहसीलों से अविवादित फौती दर्ज करने के लिए आदेश जारी किए गए थे। अभियान के तहत आवेदन भी खूब हुए क्योंकि लोगों को उम्मीद थी कि सालों से लटकी उनकी फौती का काम अब जल्द हो जाएगा। लेेकिन ऐसा नहीं हो सका। वैसे तो जिले की छह तहसीलों में कुल 11324 लोगों ने फौती दर्ज कराने के लिए आवेदन किया। इसमें से 9601 आवेदनों में कोई विवाद न होने पर फौती दर्ज करने की रिपोर्ट भी लगाई गई। इसके बाद भी आज तक 90 प्रतिशत फौती के आदेश ऑनलाइन दर्ज नहीं हो सके हैं। राजस्व विभाग द्वारा खतौनी की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। ऐसे में ऑनलाइन खतौनी में जब तक फौती का आदेश नहीं दर्ज होता है, तब तक इसके कोई मायने नहीं।
लोग अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें सही जवाब नहीं मिल पा रहा है। तहसील प्रशासन ने भी ऑनलाइन फौती दर्ज करने के बजाए उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
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ये होती है फौती
फौती को दूसरे शब्दों में वरासत भी कहा जाता है। इसके तहत अगर किसी भूमिधर की मृत्यु हो जाती है तो उसके उत्तराधिकारियों को अपना नाम अभिलेखों को दर्ज कराने के लिए आवेदन करना होता है। लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट के बाद मृतक के नाम के स्थान पर उसके उत्तराधिकारियों का नाम दर्ज कर दिया जाता है।
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केस एक: गांव कुतुपुर निवासी बाबूराम की मौत के बाद उनके पुत्र स्वदेश ने फौती अभियान के दौरान भूमि अपने नाम दर्ज करने के लिए आवेदन किया था। अब तक ऑनलाइन फर्द में उनके नाम भूमि दर्ज होने का आदेश प्रदर्शित नहीं हो रहा है।
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केस दो:
गांव कछपुरा निवासी पंकज कुमार ने अपने पिता की मृत्यु के बाद फौती के लिए आवेदन किया था। लगभग छह माह बाद भी उनकी फौती दर्ज नहीं हो सकी है। जब भी जानकारी करने जाते हैं तो उन्हें टहला दिया जाता है।
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तहसीलवार फौती आवेदन और स्वीकृत की संख्या
तहसील का नाम कुल आवेदन स्वीकृत आवेदन
-मैनपुरी 1839 1442
-करहल 1482 1215
-भोगांव 3042 2554
-किशनी 1472 1149
-घिरोर 2051 1968
-कुरावली 1438 1273
-कुल 11324 9601
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वर्जन
सभी फौती ऑनलाइन दर्ज करने के आदेश दिए गए थे। फौती ऑनलाइन दर्ज क्यों नहीं हो सकीं इस बारे में जानकारी की जाएगी। साथ ही जल्द से जल्द सभी फौती आदेश ऑनलाइन भी दर्ज कराए जाएंगे। -बी. राम, एडीएम।
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