भले ही अन्य विभाग हाईटेक हो गए हों, लेकिन बांट माप विभाग अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है। टेक्निकल एक्सपर्ट की कमी के चलते चिप से पेट्रोल चोरी पकड़ना विभाग के लिए दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। लखनऊ में चिप से पेट्रोल चोरी पकड़ में आई है तो आगरा में भी कई पंपों पर ये खेल लंबे समय से चल रहा है। पकड़ में न आने का बड़ा कारण, संबंधित विभाग के पास इस तकनीकी की काट नहीं है।
बिना एक्सपर्ट टीम के इनको पकड़ना आसान नहीं है। पंप पर जॉब करने वाले कर्मचारी (नाम न छापने की शर्त पर) से पता चला कि अधिकांश पंपों पर ये खेल चल रहा है। इस चोरी को पकड़ना विभागीय अधिकारियों के लिए दूर की कौड़ी है। चिप का रिमोट मैनेजर के पास होता है, जांच में अधिकारी पंप से खुली पेट्रोल लीटर में भरते हैं, इस वक्त रिमोट से छेड़खानी नहीं की जाती। जांच सही बैठती है। बताया कभी-कभार तकनीकी खराबी होने से घटतौली पकड़ में आ जाती है।
जिन पंपों पर ये कारस्तानी हो रही है, उसमें पेट्रोल के शुरूआत में ही खेल हो जाता है। ग्राहकों को इसे पकड़ना आसान नहीं है। इन पंपों पर 50, 100, 150, 200 राउंड फिगर में रुपये फीड कर दिए जाते हैं। बताते हैं कि इस फिगर के रुपयों में पहले से ही तय घटतौली दर्ज रहती है।
सहायक नियंत्रक विधिक माप विज्ञान गुलाब सिंह का कहना है कि जांच में घटतौली के मामले पकड़ में आने पर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है। चिप के जरिए चोरी को पकड़ने के लिए एक्सपर्ट टीम की जरूरत रहती है। वहीं आगरा पेट्रोल डीलर एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी उपेंद्र सिंह के अनुसार जानबूझकर घटतौली करने वाले पंपों का एसोसिएशन बहिष्कार करती है। अब स्वचालित मशीन आने लगी हैं, जिसमें घटतौली करना आसान नहीं है।
पंप कर्मचारियों को नहीं मिलता वेतन
जानकर हैरत होगी, लेकिन सही है। अधिकतर पंपों पर पेट्रोल भरने वाले कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलता। इनका घटतौली में कमीशन तय होता है। वेतन भले ही नहीं मिलता, लेकिन कमीशन से अच्छी-खासी कमाई हो जाती है। औसतन महीने में प्रति कर्मचारी को 10 से 14 हजार रुपये तक बन जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि क्या करें साहब...वेतन मिलता नहीं, तो मजबूरन पंप स्वामी की इस करतूत में शामिल होना पड़ता है। कुछ को वेतन मिलता है तो वह बहुत कम है।