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Agra News: आरबीआई के 2000 का नोट वापस लेने की घोषणा से बाजार में मची खलबली

Fri, 19 May 2023 11:44 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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कासगंज। आरबीआई का 2000 के नोट को वापस लेने के फैसले की जानकारी जैसे ही सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों के बीच आई तो बाजार में खलबली मच गई। सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। यह नोट 23 मई से 30 सितंबर तक बैंक से बदले जा सकते हैं। एक बार में अधिकतम 20000 रुपये बदले जा सकते हैं।
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कारोबारियों के बीच आरबीआई का निर्णय आते ही लोगों के बीच घबराहट फैल गई। लोग इस बात को लेकर परेशान हैं कि अब 2000 रुपये के नोट का लेनदेन में प्रयोग करने में दिक्कत होगी। लोग अब 2000 का नोट स्वीकार नहीं करेंगे और बैंक के द्वारा भी निश्चित सीमा में ही नोट बदले जाएंगे। जिससे गल्ला मंडी, सराफा कारोबार जहां बड़े लेनदेन होते हैं वहां दिक्कतें होंगी। राजनैतिक दल के लोग भी आरबीआई के इस फैसले पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
बोले लोग-
- वर्ष 2016 में भी 1000 और 500 रुपये के नोट का चलन रोका गया और नए नोट जारी किए गए। जिससे कारोबार में काफी समय तक अस्थिरता बनी रही। करीब साढ़े 6 साल में अब 2000 का नोट बैंक को वापस करने के निर्देश दिए हैं। इससे बाजार में लेनदेन में दिक्कतें होंगी। अखिलेश अग्रवाल, नगर अध्यक्ष, व्यापार मंडल
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- आरबीआई के निर्देशों के तुरंत बाद ही कारोबारियों ने 2000 रुपये का नोट लेना बंद कर दिया है। दिल्ली के सराफा बाजार में शुक्रवार से ही नोट स्वीकार नहीं किए जा रहे। जिससे सोने की कीमत में 200 रुपये की वृद्धि हो गई है। सरकार इस तरह के फैसले बार बार ले रही है। इसका प्रभाव अर्थव्यवस्था पर फिर से सामने आएगा- दीपक गुप्ता, जिला महामंत्री, सराफा एसोसिएशन।

- 2000 के नोट को बैंक वापस लेंगे। इससे बाजार में लेनदेन प्रभावित होगा वहीं अर्थव्यवस्था पर भी असर आएगा। बार बार इस तरह के निर्णय से अस्थिरता का माहौल बनेगा। लोग लेनदेन करने में भयभीत होंगे। छोटे शहरों और कस्बों में जहां नकदी का चलन है वहां दिक्कतें होंगी।
- प्रदीप अग्रवाल, सीए।

- पहले नोट बंदी के कारण लोगों को तमाम मुसीबतें उठानी पड़ी। अब फिर से आरबीआई ने 2000 के नोट को वापस लेने की घोषणा की है। जिससे बाजार में लेनदेन के कार्य प्रभावित होंगे। सरकार को बार बार ऐसे फैसले नहीं करने चाहिए- डीपी राना, बसपा जिलाध्यक्ष।

- सरकार ने अपने उद्योपतियों के कालेधन को 2000 के नोट से खपाने में मदद की। अब यह नोट बैंक को वापस लौटाने का निर्णय लिया है। जनता की गाढ़ी कमाई का बार बार मुद्रा बदलने के नाम पर दुरूप्रयोग किया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि सरकार के पास अर्थशास्त्र का कतई ज्ञान नहीं है। जिससे फिर अस्थिरता का माहौल पैदा होगा- विक्रम यादव, सपा जिलाध्यक्ष।
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