राणा सांगा पर टिप्पणी करने के मामले में अधिवक्ता ने सपा के राज्य सभा सांसद रामजीलाल सुमन और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ सिविल कोर्ट में वाद दायर किया था। सुनवाई के बाद अवर न्यायालय ने खारिज कर दिया था। वादी ने सत्र न्यायालय में रिवीजन किया था। जिला जज संजय कुमार मलिक के आदेश पर अवर न्यायालय ने फिर से सुनवाई के लिए प्रकीर्ण वाद दर्ज कर लिया। अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।
अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने राणा सांगा पर टिप्पणी करने के आरोप में सपा के राज्य सभा सांसद रामजीलाल सुमन और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को प्रतिवादी बनाकर 24 मार्च को अदालत में वाद प्रस्तुत किया था। 10 अप्रैल को अवर न्यायालय ने प्रकीर्ण वाद विधिक रूप से पोषणीय न होने पर खारिज कर दिया था। वादी ने आदेश के विरुद्ध 9 मई को सत्र न्यायालय में रिवीजन किया। जिस पर 9 और 13 मई को सुनवाई हुई थी।
वादी की तरफ से अधिवक्ताओं ने तर्क दिए। तब न्यायालय ने कहा कि अवर न्यायालय को यह भी देखना आवश्यक था कि क्या प्रश्नगत प्रकरण में केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया जाना आवश्यक है या नहीं। इस संबंध में कोई विचार नहीं किया गया। लिखा है कि वर्णित प्रेक्षणों एवं बिन्दुओं पर पक्षगण के अधिवक्ताओं को फिर से सुनकर विधि सम्मत आदेश पारित करें। जिसके अनुपालन में अवर न्यायालय ने फिर प्रकीर्ण वाद दर्ज कर लिया। अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।