मैनपुरी।
थाना एलाऊ में बेटे को छुडाने पहुंची रामबेटी बेटे को छोड़ देने की मिन्नतें कर रही थी। इस बीच किसी ने कह दिया कि पुत्र को जेल भेजा जाएगा। बस यही बात सुन रामबेटी को सदमा लग गया। कुछ ही देर में दम तोड़ दिया। परिजन का आरोप है कि पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो वृद्धा की जान नही जाती।
एलाऊ थाना पिछले कुछ समय से अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चाओं में है। कभी पीड़ित की शिकायत दर्ज नहीं की जाती। तो कभी थाने से भगा दिया जाता है। महिला थानाध्यक्ष की कार्यशैली भी इन दिनों चर्चा में है। बुधवार को गांव मधुपुरी में झगडे़ की सूचना पर पुलिस ने दोनों पक्ष को समझा बुझा कर मामला निपटा दिया। गांव पहुंचे पुलिसकर्मियों ने यदि जरा भी गंभीरता दिखाई होती और थाने लाकर कड़ी हिदायत दी होती तो शायद दोबारा झगडे़ की नौबत नहीं आती। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। दोबारा सूचना पर रामबेटी के बेटे को पुलिस पकड़ कर थाने ले आई। जबकि दूसरे पक्ष को नहीं लाई।
थाना पुलिस की कार्यशैली रामबेटी के परिजन को निराश करने वाली है। रामबेटी जब बेटे को छुड़ाने के लिए थाने में मिन्नतें कर रही थी। तभी किसी पुलिसकर्मी ने झिड़कते हुए कह दिया कि तेरा बेटा तो जेल जाएगा। बस यही बात सुन रामबेटी को सदमा लग गया और कुछ ही देर में प्राण त्याग दिए। परिजन का आरोप है कि यदि पुलिस कार्रवाई करती तो शायद वृद्धा की जान नहीं जाती। बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम के बाद वृद्धा का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
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रामबेटी की मौत का कौन जिम्मेदार
थाना एलाऊ परिसर में बेटे को छुड़ाने आई एक मां की मौत का मामला सभी की जुबान पर है। लोगों का कहना है कि अब अधिकारियों को यह भी तय करना होगा कि आखिर रामबेटी की मौत का जिम्मेदार कौन है। विपक्षी जिनसे झगड़ा हुआ था वह लोग जिम्मेदार हैं या थाना एलाऊ पुलिस जो कि गांव में जांच करने गई और सही निर्णय न ले सकी। मामला रफा करने के बाद अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ कर वापस लौट गई। इसका जवाब अब अधिकारियों को तलाशना होगा।