आनंद के बाद भावुकता के क्षण आ गए हैं। सिया की विदाई का समय हो गया है। जनकपुर वासी व्याकुल हैं। माता सुनयना और जनक भावविभोर हैं। राजा राम चले संग ले सिय को प्राण प्यारी, अब कैसे जीएं नर नारी... विदाई गीत के ये स्वर सबके मन को भिगो रहे हैं। जनकदुलारी जनकपुरी से विदा हो चली हैं।
शनिवार को रात 10:40 बजे रामबारात अयोध्या प्रस्थान कर गई। जनक महल व प्रांगण में बैठे भक्तों ने सीता को भावभीनी विदाई दी और सुखी जीवन का आशीर्वाद भी दिया। इससे पूर्व रात 8 बजे सियाराम व अन्य भ्राता रथों पर सवार होकर जनक महल आए। वहां उनका पुष्प वर्षा से स्वागत हुआ। उसके बाद राजा जनक (सहजीव रतन), माता सुनयना (नीलम रतन जैन) व सभी पदाधिकारियों ने सीताराम की आरती उतारी। स्वरूपों पर चहुं ओर से पुष्प वर्षा हो रही थी। भजन गायक चंचल उपाध्याय ने भजनों से भक्ति की बयार बहाई। श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि... तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार...राम नाम की माला जपेगा कोई दिलवाला... आदि भजनों पर भक्त रामनाम में मगन हो गए। भगवान के दर्शन को मंच पर लोगों की कतार लगी रही। सबने उनका आशीर्वाद लिया। विदाई के दिन जनक महल में फूलों की 21 तोपें लगाई गई थीं। चारों ओर से होती पुष्प वर्षा ने दृश्य को अद्भुत और अलौकिक बना दिया।
विदाई से पूर्व भी आरती हुई। रामलीला कमेटी व जनकपुरी समिति के पदाधिकारी थिरकते हुए अपने राजा राम का यशगान कर रहे थे। उसके बाद मिलनी की रस्म हुई। जनकपुरी समिति के पदाधिकारियों ने रामलीला कमेटी के सदस्यों का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। इस अवसर पर राजा दशरथ (राम अवतार गुप्ता), सुनैना (जयमाला), रामलीला कमेटी के अध्यक्ष जगन प्रसाद गर्ग, महामंत्री श्रीभगवान अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, मनोज पोली भाई, दिनेश बंसल, अतुल बंसल, संजय तिवारी, उमेश कंसल, राहुल, आशीष आदि उपस्थित थे।
जनकपुरी समिति के संरक्षक योगेंद्र चौहान, रवि परमार, राम प्रताप चौहान, प्रमोद गुप्ता, संजीव गोयल, विनय शर्मा, सत्यप्रकाश शर्मा, राजेश गुप्ता, अनिल अग्रवाल, अनुज पटेल, कृष्णानंद शर्मा, गौरव आदि मौजूद रहे। संचालन रमन ने किया।
रामलीला कमेटी सदस्य ने की मीडिया से अभद्रता
जनकपुरी में आई रामलीला कमेटी का एक सदस्य नशे में था। उसने मंच पर चढ़ रहे मीडिया कर्मियाें से अभद्रता की व उनका कैमरा तोड़ने की कोशिश की। विरोध करने पर वह अभद्र व्यवहार करने लगा। इस पर हंगामा हो गया। विवाद बढ़ता देख कमेटी के वरिष्ठ सदस्य उसे जनक महल से बाहर ले गए।
देर से आए राजा जनक
स्वरूपों के आने के बाद उनकी आरती शुरू गई लेकिन राजा जनक का कहीं पता नहीं था। कमेटी और राजा जनक के बीच चल रही आपसी खींचतान इसका कारण मानी जा रही थी। दोपहर में बढ़हार में जनकपुरी समिति के लोगों को नहीं बुलाया गया। आरती के मध्य में राजा जनक व सुनयना आए। उसके बाद मंच पर भी अनमने मन से बैठे। पूरे समय तक अपने मोबाइल में ही नजरें गड़ाए रहे। राजा दशरथ भी काफी देर से पहुंचे। रामलीला कमेटी के पदाधिकारी उन्हें लेकर आए।
मंच पर फैली अव्यवस्था
सीताराम के दर्शन को मंच पर लोगों की भीड़ लग गई। अव्यवस्था का माहौल था। भीड़ बढ़ता देखकर जनकपुरी समिति के पदाधिकारियों ने दोनों छोरों पर अपने स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई पर उसके बावजूद मंच पर भारी भीड़ बनी रही। उधर महल प्रांगण में भी अव्यवस्था पसरी थी। सभी लोग आगे आकर फोटोग्राफी करने में जुटे थे। इससे बाहर गुजर रहे लोगों को दर्शन सुलभ नहीं हो पाए।