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रामायण वही लेकिन भक्ति भाव में कमी

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28एमएनपी-16-भोगांव में रामायण देखता एक परिवार - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। लॉकडाउन के बीच देश की नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर और संस्कारों से रूबरू कराने के लिए दूरदर्शन पर फिर एक बार शनिवार से रामायण का प्रसारण शुरू हो गया। रामायण तो वही रही, लेकिन लोगों के भक्ति भाव में इस बार कमी नजर आई।
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रामायण, भगवान श्रीराम के जीवन की गाथा है। पुराने समय में जब इसका प्रसारण टीवी पर हुआ था तो मानो हर कोई साक्षात भगवान के दर्शन के लिए उत्साहित हता था। आज भले ही कोरोना के चलते सड़कों पर लॉकडाउन है, लेकिन तब रामायण के प्रसारण से पहले खुद ही सड़कों पर लॉकडाउन जैसा ही सन्नाटा होता था। भगवान श्रीराम के प्रति अपार श्रद्घा की प्रतीक रामायण कथा को लोग भगवान ही मानते थे। रामायण शुरू होते ही लोग अगरबत्ती लगाकर पूजन करने के साथ ही फलों का भोग भी लगाते थे, लेकिन इस बार जब दूरदर्शन पर शनिवार सुबह नौ बजे से प्रसारण हुआ तो रामायण तो वही थी, लेकिन भक्ति का भाव कुछ अलग था। युवा पीढ़ी ने केवल इसे एक धारावाहिक की तरह ही देखा। हालांकि बुजुर्ग इस रामायण को देखकर एक बार फिर भाव विभोर नजर आए।
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लोगों की बात
लगभग 30 साल पहले रामायण को लेकर घरों में उत्साह था, शनिवार को रामायण तो देखी गई, लेकिन परिवार में पहले जैसी श्रद्धा नहीं रही।
सत्यसेवक मिश्रा
रामायण देखने के लिए अब बच्चों में उत्साह नहीं है। आज तमाम बच्चे रामायण का महत्व और पात्रों के बार में जानकारी ही नहीं रखते हैं।
लल्ला चौबे
एक समय था जब रामायण शुरू होने से पहले घरों में सारे कामकाज निपटा लेते थे, शनिवार को पहले जैसा कहीं भी भक्ति भाव नहीं दिखा।
मधु मिश्रा
रामायण शुरू होने से बच्चों को रामायण के बारे में जानकारी मिलेगी। परिवार के बुजुर्ग सदस्य रामायण के बारे में उनको जानकारी भी देंगेे।
रेखा कुमारी
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