रविवार को शुरू हुआ था उत्सव
इससे पूर्व तीन दिवसीय रामनवमी उत्सव का प्रारंभ रविवार को हुआ। यहां सुबह उत्सव प्रतिमाओं का अभिषेक हुआ शाम को सूर्य वाहन पर विराजमान होकर भगवान राम माता जानकी और लक्ष्मण जी निकले। इसी तरह सोमवार को स्वर्ण हाथी पर विराजमान होकर भगवान की सवारी निकाली गई।
रंगनाथ मंदिर की सीईओ अनघा श्री निवासन ने बताया कि उत्सव के दौरान प्रतिदिन उत्सव प्रतिमाओं का अभिषेक होता है लेकिन राम नवमी के दिन उत्सव प्रतिमा और मूल प्रतिमा दोनों का एक साथ अभिषेक लोक दर्शन के लिये किया जाता है।
नक्षत्र और तिथि के एक साथ होने के कारण मनाई गई रामनवमी
रामनवमी का पर्व वैसे तो एक माह पूर्व ही मनाया गया लेकिन दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में मंगलवार को इस पर्व को मनाया गया। मंदिर के सुपरवाइजर लखन लाल पाठक ने बताया कि उत्तर भारत में तिथि के हिसाब से उत्सव मनाए जाते हैं लेकिन दक्षिण भारत में जन्म नक्षत्र और तिथि एक साथ हो तभी उत्सव मनाने की परंपरा है। ऐसा तीन चार वर्ष में एक बार होता है जब उत्सव उत्तर और दक्षिण में अलग-अलग मनाया जाता है।