कासगंज। भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के आंदोलन में शामिल रहे कारसेवकों का सपना पूरा हो रहा है तो उनमें उत्साह और उमंग है। इसके लिए सोमवार को अयोध्या में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए। इसके बाद रामभक्तों द्वारा शहर से लेकर कस्बों तक धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी की गई है।
वर्ष 1990 में राम मंदिर निर्माण के लिए बड़ा आंदोलन छिड़ा।
1992 में भाजपा के नेतृत्व में चले इस आंदोलन में कासगंज से बड़ी संख्या में कारसेवकों ने हिस्सा लिया। 1990 में कासगंज के सैकड़ों कारसेवक अयोध्या में आंदोलन करते रहे। वहीं 1992 में कई कारसेवकों को कासगंज में ही पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। अयोध्या जाने के लिए स्टेशन पहुंचे 200 से अधिक कारसेवकों को स्टेशन से ही गिरफ्तार कर लिया गया था।
भगवान श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए लंबे समय से उम्मीद लगाए बैठे रामभक्तों में खुशी की लहर है। वैसे तो सोमवार से ही अयोध्या में अनुष्ठान की शुरूआत हो गई है, लेकिन मुख्य भूमि पूजन बुधवार को होगा। ऐसे में रामभक्तों ने बुधवार को जिलेभर में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करने की तैयारी की है।
अब दूर हो रहे तब के जख्मों के दर्द
वर्ष 1990 में जब अयोध्या में आंदोलन चल रहा था तब कासगंज में भी सत्याग्रह हो रहा था। सत्याग्रह करने वाले तमाम हिंदूवादियों को जेल भेजा गया। हिंदूवादी नेता ज्ञान माहेश्वरी, कौशल कुमार साहू अयोध्या में थे, लेकिन यहां उनके परिवार में पुलिस हर रोज दबिशें देकर परिजनों को डरा रही थी। हिंदूवादियों का कहना है कि उस समय के जख्म अब दूर हुए हैं।
यह होंगे कार्यक्रम
बुधवार शाम 5 बजे विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन गंगा देवी माहेश्वरी धर्मशाला में किया जाएगा। सोरों में गंगाभक्ति समिति भी पूजन कार्यक्रम करेगी। स्वयंसेवक अपनी सहूलियत से धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करेंगे। भाजपा और बजरंग दल भी बुधवार को अलग-अलग कार्यक्रम करेंगे।
बोले कारसेवक
- वर्ष 1990 में पुलिस कारसेवा के नाम पर कासगंज से लोगों को अयोध्या नहीं जाने दे रही थी। उस समय चोरी-छिपे बढ़ारी स्टेशन पहुंचे। वहां से ट्रेन पकड़कर लखनऊ पहुंचे। कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। तब अयोध्या पहुंच सके। वहां जब कारसेवा के लिए 30 अक्टूबर को जत्था आगे बढ़ा तो सरकार ने गोलियां चलवा दी। - ज्ञान माहेश्वरी, कारसेवक।
- 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को दो बार अयोध्या में नरसंहार हुआ। उस समय कासगंज के कारसेवक भी अयोध्या में मौजूद थे। आंसू गैस से कासगंज के कारसेवकों की हालत बिगड़ी, लेकिन वह जय श्रीराम का उद्घोष करते हुए आगे बढ़े। वर्ष 1992 में फिर कारसेवक अयोध्या में जुटे। तब आंदोलन अब सफल हो पाया है। - कौशल किशोर साहू, कारसेवक।