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मंदिर की आधारशिला का कार्यक्रम तय होने से कारसेवक कर रहे फक्र

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सोरों (कासगंज)। मंदिर की आधारशिला का कार्यक्रम तय होने पर होने पर कारसेवक अब अपने को गोरवान्वित अनुभव कर रहे हैं। उनका रामलला के मंदिर का सपना पूरा हो रहा है। इस सपने को पूरा करने के लिए तीर्थनगरी के बड़ी संख्या में कारसेवकों ने आंदोलन में सहभागिता की थी।
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30 अक्तूबर 1990 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलवा दी थी। इसके बाद 1991 में विहिप के जेल भरो आंदोलन में 250 से अधिक तीर्थनगरी के हिंदूवादी लोगों ने गिरफ्तारियां दीं थीं। दिसंबर 1992 में जब विवादित ढांचा गिराया गया तब भी बड़ी संख्या में तीर्थनगरी से लोगों ने इसमें हिस्सा लिया था।
आज राम जन्म भूमि मुक्ति के आंदोलन से जुडे़ रहे लोग में रामलला का अपना घर वापस मिलने पर खुशी है। ये लोग पांच अगस्त को मंदिर की आधारशिला रखने के कार्यक्रम की खुशी मना रहे है। इस दिन लोग अपने घरों में दिए जलाकर व मिठाई बांटकर दीपोत्सव मनाएंगे। विहिप हरि की पदी व मंदिरों पर दिए जलाएगी।
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कार सेवकों का अस्थि विसर्जन भी सोरों में हुआ था
1990 में अयेाध्या में प्रशासन की ओर से कारसेवकों पर गोली चलाये जाने के बाद मृतक कारसेवकों की अस्थि कलश यात्रा तीर्थनगरी के वराह घाट पर विहिप के स्वामी सुरेशानंद के नेतृत्व में पहुंची थी। तीर्थनगरी के वयोवृद्ध विद्वान पं. राम बल्लभ भट्ट ने विधिविधान से हरि की पदी में अस्थि विसर्जन कराया था। इस कार्यक्रम में ब्रजप्रांत भाजपा अध्यक्ष रजनीकांत माहेश्वरी, सूरज सिंह शाक्य, रामबाबू शर्मा, कैलाशचंद्र मिश्रा, डॉ. सुरेंद्र शर्मा, आनंद प्रकाश गुप्ता, रामेश्वरदयाल महेरे, कालीचरन माफीदार, बागीश दुबे, सुमन गुप्ता आदि सैकड़ों राम भक्त मौजूद रहे थे।
सोरों से सन 1992 में एक बस से 80 कारसेवक मेरे साथ अयोध्या रवाना हुए थे। इसके अतिरिक्त अन्य कारसेवक भी आयोध्या पहुंचे। जिन्होंने 6 दिसंबर 1992 की कारसेवा में भाग लिया था। - कालीचरन माफीदार, जिला उपाध्यक्ष विहिप।
अयोध्या में ढांचा विध्वंस वाले दिन कारसेवकों के साथ मैं भी मौजूद था। अब प्रभु श्रीराम का मंदिर उनके जीवनकाल में ही बन रहा है, इसकी उन्हें बेहद खुशी है। अब शीघ्र ही प्रभुराम के मंदिर निर्माण के दौरान ही कारसेवा करने अयोध्या जाएंगे। - रामकिशन रामलोटा, पूर्व नगर संयोजक, बजरंगदल
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