रक्षाबंधन का पर्व पर सोमवार को 558 साल बाद गुरु और शनि अपनी राशि में वक्रीय होंगे। गुरु अपनी राशि धनु में और शनि मकर में वक्रीय रहेंगे । चंद्रमा भी शनि के साथ मकर राशि में रहेगा। ऐसा योग 558 साल पहले 22 जुलाई 1462 में बना था। सोमवार को सुबह 9.30 बजे तक भद्रा रहेगी। भद्रा के बाद ही बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।
बाह के ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि सोमवार और पूर्णिमा एक साथ होने से आनंद योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, श्रवण योग बन रहा है। सोमवार को सुबह 9.30 से 10.30 बजे से शुभ, दोपहर 1.30 से 3 बजे तक चर, 3 से 4.30 बजे तक लाभ, शाम 4.30 से 6 बजे तक अमृत, 6 से 7.30 बजे तक चर का चौघड़िया मुहूर्त रहेगा । सोमवार के दिन रक्षाबंधन होने की वजह से अन्न एवं धन धान्य के लिए अच्छे अवसर पैदा होंगे ।