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Agra News: पुलिस ने महाभारत-रामायण के प्रसंग सुनाकर बदला मन, घर लौटी राखी

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राखी को समझाती डौकी पुलिस स्रोत पुलिस
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फतेहाबाद (आगरा)। प्रयागराज में हुए महाकुंभ के दौरान जूना अखाड़े में दीक्षा लेकर गांव टरकपुरा (बमरौली कटारा) की 14 वर्षीय राखी साध्वी बनाना चाहती थी मगर उसे नाबालिग होने के कारण वापस भेज दिया गया था। तब से वो घर वापस नहीं आना चाहती थी। हाल ही में बिना बताए अपनी सहेली के घर चली गई। किशोरी की मां ने पुलिस से गुहार लगाई। पुलिस ने उसे बुलाकर तीन दिन काउंसिलिंग की। महाभारत और रामायण के प्रसंग सुनाए। इसके बाद उसका मन बदल गया। उसने कहा कि अब वो कभी मां-पिता और घर को छोड़कर नहीं जाएगी।
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मूलरूप से थाना बमरौली कटारा थाना क्षेत्र के गांव टरकपुरा गांव के संदीप सिंह धाकरे पेठा फैक्टरी में काम करते हैं। वह डाैकी क्षेत्र में किराये पर घर लेकर रहते हैं। 25 दिसंबर 2024 को वो बेटी राखी और पत्नी के साथ प्रयागराज कुंभ मेला गए थे। वहां पर उन्हें विलासपुर, हरियाणा के कौशल गिरी महाराज मिले थे। उन्होंने राखी को दीक्षा दी थी। उसे दान के रूप में प्राप्त किया था। हालांकि, बाद में नाबालिग होने के कारण उसे अखाड़े से निकाल दिया गया था। तब किशोरी परिजन के साथ गोकुल आ गई थी। यहीं पर रहकर शिक्षा लेने लगी।



वह जब भी घर आती तो मगर हर बार महंत काैशल गिरि के पास जाने की कहती थी। इस पर परिजन ने पुलिस से शिकायत की थी। मामले में केस दर्ज हुआ था। इस पर उसे नारी संरक्षण गृह, नोएडा भेजा गया था। वहां पर भी वो अध्यात्म की बात करती थी। पांच मई को परिजन उसे ले आए थे। 6 नवंबर को राखी बिना बताए घर से अपनी सहेली के घर आगरा चली गई थी।
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इस पर मां ने डौकी पुलिस से ऑनलाइन शिकायत की थी। इस पर डाैकी थाना के एसओ योगेश कुमार ने राखी को फोन करके बुलाया। वहीं महंत से भी बात की। उनसे कहा कि नाबालिग बच्ची कैसे आश्रम में रह सकती है। यह कानूनी रूप से ठीक नहीं है, इसलिए किशोरी को आश्रम में रखने के लिए मना कर दें। वहीं राखी को भी घर बुलाया गया।



एसओ ने बताया कि उसे रामायण और महाभारत के कई प्रसंग सुनाए। उससे कहा कि अभी उसकी उम्र अध्यात्म की तरफ जाने की नहीं है। पढ़-लिखकर अपने माता-पिता के साथ गांव का नाम रोशन कर सकती है। तीन दिन तक समझाने पर वह माता-पिता के साथ रहने के लिए तैयार हो गई। मां रीमा का कहना था महंत की बातों में आकर बेटी का मन बदल गया था। वह हर समय बाबा का ही नाम लेती रहती थी।
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