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तीन दशक बाद रक्षाबंधन पर बन रहे हैं कई शुभ संयोग

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मैनपुरी। भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार आज धूमधाम से मनाया जाएगा। तीन दशक बाद रक्षाबंधन पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। सोमवार व पूर्णिमा के कारण इस वर्ष आनंद योग, सवार्थ सिद्धि योग एवं श्रावण नक्षत्र एक साथ पड़ रहे हैं। इस बार राखी का त्योहार कोरोना काल में आ रहा है। इसके चलते जिले में हमेशा की तरह चहल-पहल तो नजर नहीं आएगी, लेकिन घरों में भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक यह पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा।
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आचार्य रामानंदन ने बताया कि रक्षाबंधन पर यह योग वर्ष 1991 के बाद अब बना है। यह शुभ संयोग करीब तीन दशक बाद सामने आ रहा है। रक्षाबंधन पर भद्रायोग सुबह 9.30 बजे समाप्त हो रहा है। श्रावणी उपाकर्म भी इसी दिन किए जाएंगे। सुबह 9.30 बजे से शाम तक राखी बांधने के कई मुहूर्त रहेंगे। आचार्य का कहना है कि वैसे मुख्य रूप से वृश्चिक, कुंभ व सिंह लग्न में राखी बंधवाना सबसे शुभ माना जाता है। यह शुभ संयोग शाम को गोधूलि बेला तक जारी रहेगा।
दीर्घायु, समृद्धि, सुख, सौभाग्य से परिपूर्ण योग
श्रावण पूर्णिमा को सावन का पांचवां सोमवार है। सुबह 6 बजकर 37 मिनट के बाद 28 योगों में सर्वश्रेष्ठ आयुष्मान योग इस समय विद्यमान रहेगा। सुबह 7 बजकर 18 मिनट के बाद पश्चात श्रवण नक्षत्र आ जाएगा, जो सिद्धि योग का निर्माण करेगा। सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर भद्रा भी समाप्त हो जाएगी। इस साल पर्व पर सिद्धि और आयुष्मान योग बन रहे हैं। इन शुभ योग में रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहनों की दीर्घायु, समृद्धि, सुख, सौभाग्य से परिपूर्ण रहेगा।
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राखी बंधवाने का शुभ मुहूर्त
तीन अगस्त को भद्रा सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक है। राखी का त्योहार सुबह 9 बजकर 30 मिनट से आरंभ हो जाएगा। दोपहर को 1 बजकर 35 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 35 मिनट तक बहुत ही अच्छा व शुभ समय है। इसके बाद शाम को 7 बजकर 30 मिनट से लेकर रात 9.30 के बीच में बहुत अच्छा मुहूर्त है।
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