रोती बिलखती मृतक राजू की मां
- फोटो : अमर उजाला
राजू को कभी कभार काम के लिए अंशुल बुला लेता था। 18 नवंबर 2018 को अंशुल परिवार सहित बाहर गया था। लौटा तो घर से जेवरात गायब थे। उसने राजू पर शक जाहिर किया। थाने में केस दर्ज नहीं हुआ था। न ही कोई तहरीर थी।
शक के आधार पर ही पुलिस राजू को उठा ले गई थी। 22 नवंबर को राजू की मौत हो जाने के बाद पुलिस ने अंशुल के खिलाफ केस तो दर्ज किया लेकिन गिरफ्तारी नहीं कर रही थी। अमर उजाला ने इसकी खबरें प्रमुखता से छापीं।
इसके बाद वैश्य एकता परिषद ने मुद्दा उठाया। कोर्ट ने टिप्पणी की, मुल्जिमों को अनुचित लाभ पहुंचा रही है पुलिस। इसके बाद पुलिस ने अंशुल पर 20 हजार का ईनाम घोषित किया। घटना के 39 दिन बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। उसे कोर्ट में पेश किया गया। वहां से जेल भेज दिया गया। इस मामले में एक और नामजद आरोपी विवेक परिहार की गिरफ्तारी पहले ही की जा चुकी है। वह जेल में है।
मृतक राजू गुप्ता की मां रेनू लता गुप्ता
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राजू की मां रेनूलता का कहना है कि वह जज के सामने धारा 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराना चाहती हैं। पुलिस ने बहुत देरी की। अगर अमर उजाला ने यह मुद्दा न उठाया होता तो शायद अब भी अंशुल को न पकड़ा जाता।
दरोगा की गिरफ्तारी पर खुलेगा पूरा राज
राजू के चाचा अशोक कुमार का कहना है कि अमर उजाला ने बहुत साथ दिया है। पुलिस को चाहिए कि अब आरोपी दरोगा अनुज सिरोही को भी जल्द से जल्द गिरफ्तार करे। उससे पूछताछ में ही पूरा राज खुलेगा। राजू को थाने में कई पुलिसकर्मियों ने पीटा था। उनके नाम खुलने चाहिए।
अमर उजाला की खबरों से बना दबाव
व्यापारी नेता टीएन अग्रवाल का कहना है कि राजू गुप्ता हत्याकांड की खबरें अमर उजाला में लगातार आती रहीं। इसी का असर रहा कि पुलिस पर दबाव बना। सत्ताधारी दल के नेता भी सक्रिय हुए। इसी का नतीजा है कि एक आरोपी पकड़ा गया। दूसरा भी जल्द पकड़ा जाना चाहिए।
राजू की मां रेनूलता और चाचा अशोक कुमार का कहना है कि राजू की हत्या में कई और पुलिसकर्मी शामिल हैं। अगर दरोगा अनुज सिरोही गिरफ्तार हो जाए तो उससे पूछताछ में उनका नाम सामने आ सकता है।