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मयन ऋषि की नगरी में हर ऐतिहासिक धरोहरों को मिले संरक्षण

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औंछा स्थित च्यवन ऋषि आश्रम - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। मयन ऋषि की नगरी में कई पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व की धरोहर हैं। ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहरों को अब सरकारी संरक्षण की जरूरत है। देखरेख के अभाव में यह धरोहरें दिनोंदिन खंडहर में बदलती जा रही हैं।
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उत्तर प्रदेश शासन ने शहर स्थिति राजा तेज सिंह के किले को संरक्षित स्मारक घोषित किया है। इससे अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की भी उम्मीद जगी है। जिले में कई ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहरें हैं। इनको संरक्षित किए जाने की कई बार मांग उठी है। अगर इनको सरकारी संरक्षण मिल जाए तो इन धरोहरों का कायाकल्प तो होगा ही पर्यटन के नक्शे पर भी जिले की तस्वीर बन सकेगी।
ऋषियों की तपोस्थली रही है औंछा
प्राचीनकाल में औंछा क्षेत्र ऋषि मुनियों की तपोस्थली रही है। च्यवन ऋषि आश्रम, अजोम कुंड की पुरातन मान्यता है। आश्रम को च्यवन ऋषि की तपोस्थली कहा जाता है। औंछा क्षेत्र में कई पुराने टीले, प्राचीन मंदिर और आश्रम पौराणिक महत्व की गवाही देते हैं। क्षेत्र में खोदाई केे दौरान आए दिन खंडित प्राचीन प्रतिमाएं निकालती हैं। सात साल पहले आगरा पुरातत्व विभाग की टीम ने सर्वे के बाद ऐसे स्थानों को संरक्षित करने की संस्तुति की थी।
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विधूना क्षेत्र का भी है पौराणिक महत्व
घिरोर क्षेत्र के मार्कडेंय विधूना का पौराणिक महत्व है। वहां के खंडहर आज भी इतिहास की याद दिलाते हैं। मार्कडेंय ऋषि को सभी देवताओं का भांजा भी कहा जाता है। मान्यता है अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इसी स्थान पर समय बिताया था। मार्कडेंय विधूना के टीले, मंदिर, खंडहर आज भी लोगों के बीच आस्था के प्रतीक हैं।
विदुर आश्रम पर लगता हर साल मेला
बेवर क्षेत्र में रसूलाबाद के पास विदुर आश्रम है। इस आश्रम पर हर साल मेला लगता है। आश्रम पर दूसरे प्रदेशों केे संत भी हर साल पहुंचकर धार्मिक आयोजन में शामिल होते हैं। लोगों के बीच मान्यता है महाभारत काल में इसी स्थान पर महात्मा विदुर ने तपस्या की थी। आश्रम के पास बड़े और पुराने घने पेड़ आज भी पुराने समय की याद दिलाते हैं। क्षेत्र के लोगों के बीच विदुर आश्रम आस्था का प्रतीक है।
जिले में कई पौराणिक, ऐतिहासिक इमारतें और स्थल हैं। इनका पुराने अभिलेखों में पता चलता है। इनको पुरातत्व विभाग का संरक्षण मिलने के बाद पर्यटन को बढ़ावा मिलने की अपार संभावनाएं हैं। शासन स्तर पर इसका प्रयास किया जाना चाहिए।
लाखन सिंह भदौरिया, साहित्यकार
मयन नगरी का बहुत पुराना इतिहास है। जिले की कई धरोहरें आज भी प्राचीनकाल की याद दिलाती हैं। इन धरोहरों के आसपास के क्षेत्र में खोदाई के दौरान आए दिन प्राचीन अवशेष मिलते हैं। इन धरोहरों को सरकारी संरक्षण दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
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ब्रजेश कठेरिया, विधायक किशनी
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