आमसान से ‘अमृत’ बरस रहा है। सहेजने के इंतजाम रामभरोसे हैं। सरकारी दफ्तरों में लगे रेन वॉटर हॉर्वेस्टिंग प्लांट से अफसर बेखबर हैं। कलक्ट्रेट परिसर में लगे प्लांट के बारे में पूछने पर एडीएम सिटी नहीं बता सके कि प्लांट कहां लगा है। उन्होंने नाजिर से पूछा, तो नाजिर ने परिसर में होने वाले जलभराव से निजात के लिए बने शॉक पिट के गड्ढे को ही प्लांट बताया। फिर चार घंटे बाद अन्य कर्मचारियों से पूछने पर दो बिल्डिंगों में रूफ टॉप प्लांट लगे होने की पुष्टि हो सकी।
कलक्ट्रेट परिसर में दो रूफ टॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट हैं। एक जिलाधिकारी कक्ष की छत से बारिश का पानी सहेजता है जबकि दूसरा प्लांट एनआईसी बिल्डिंग की छत से पानी को भूजल तक पहुंचाता है। दोनों प्लांट का पिछले दो साल से रखरखाव नहीं हो सका। दोनों प्लांट के रिचार्ज पिट पर कॉन्क्रीट के ढक्कन लगे हैं, जिन्हें खोलकर नहीं देखा जा सकता। कलक्ट्रेट परिसर में जमा होने वाले बारिश के लिए बने अभियोजन कार्यालय के सामने शॉक पिट बना है। जिसमें कचरा भरा मिला। नाली का पानी भी इसी शॉक पिट में जाता है। दूसरी तरफ मंडलायुक्त कार्यालय की छत व सभागार की छत से पानी को एकत्र कर भूजल में मिलाया जाता है। यहां दोनों प्लांट चालू हैं।
सदर तहसील में सबसे बड़ा प्लांट
आईएसओ प्रमाणित सदर तहसील में जिले का सबसे बड़ा रूफ टॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट है। करीब 10 हजार वर्ग फीट छत से बारिश का पानी सहेजा जा रहा है। सोमवार को अमर उजाला ने प्लांट की पड़ताल की, तो भूमिगत टैंक सही दिशा में मिला। एसडीएम लक्ष्मी एन सिंह ने बताया कि मुख्य टैंक को नहीं खोला जाता। पिछले महीने सभी चैंबर की सफाई की गई थी। सदर तहसील का नक्शा राजस्व परिषद से प्रमाणित होने के कारण यहां रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की गई है।