मुगल सम्राट अकबर के 400 साल पुराने मकबरे में छत और दीवारों पर बनी सुनहरी पेंटिंग बारिश के कारण आई नमी से खराब हो गई। मकबरे के प्रवेश द्वार पर बनी पेंटिंग के पैनल उखड़ने के साथ रंग भी फीके पड़ गए। तीन साल से इन पैनलों को पाड़ लगाकर रोका गया है। अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने और अधिक नुकसान से बचाने के लिए संरक्षण की योजना बनाई है। विज्ञान शाखा के विशेषज्ञों की मदद से सिकंदरा स्थित अकबर के मकबरे और एत्माद्दौला के मकबरे में मौजूद पेंटिंग को सहेजा जाएगा।
वर्ष 1605 से 1613 के बीच बनाए गए अकबर के मकबरे की हर दीवार अपनी अद्वितीय डिजाइन और छतें पेंटिंग के लिए चर्चित हैं। एएसआई की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिथा कुमार ने बताया कि नमी और समय के साथ मकबरे में मौजूद पेंटिंग खराब हो रही हैं। इन्हें सहेजने के लिए बीते सप्ताह मकबरे का निरीक्षण किया गया था। नमी के कारण यह पैनल गिरासू हैं, जिन्हें बचाने के लिए पाड़ लगाई गई है। विज्ञान शाखा की टीम के विशेषज्ञाें के साथ इन महत्वपूर्ण पेंटिंगों को सहेजने का काम शुरू किया जाएगा।
मकबरे की छत से रिसे पानी से हुईं क्षतिग्रस्त
अकबर के मकबरे में वर्ष 2023 में बारिश का पानी छत के जरिये रिसता रहा था, जिससे 12 फीट की ऊंचाई तक दीवारें प्रभावित हुई हैं। मकबरे की छत की 15 साल पहले मरम्मत कराई गई थी। रिसाव के कारण सबसे बुरा असर सुनहरी पेंटिंग पर पड़ा है। बादशाह अकबर की कब्र तक जाने वाले रास्ते के मुख्य प्रवेश द्वार पर बने बरामदे में यह पेंटिंग की गई थी।
एत्माद्दौला में भी खराब हो गईं पेंटिंग
एत्माद्दौला के मकबरे में 10 साल पहले विदेशी एनजीओ वर्ल्ड मॉन्यूमेंट फंड के प्रस्ताव पर एएसआई ने उत्तरी दरवाजे की ओर एक ब्लॉक में क्षतिग्रस्त पेंटिंग का संरक्षण कराया तो एनजीओ ने इसे और बिगाड़ दिया। इस पर एएसआई की विज्ञान शाखा के तत्कालीन अधीक्षण रसायनविद डॉ. एमके भटनागर ने एनजीओ को पेंटिंग का संरक्षण करने से रोक दिया था। अब एएसआई ने खुद ही इसका संरक्षण करने का फैसला किया है। हाल में ही फतेहपुर सीकरी में शेख सलीम चिश्ती की दरगाह की दीवारों पर बनी पेंटिंग को विज्ञान शाखा की टीम ने संरक्षित किया है।