आईएपी के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि ये बीमारी माता-पिता के जरिये बच्चों में आती है। ये जेनेटिक रक्त विकार है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं जल्दी नष्ट होने से शरीर में हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता। ऐसे में मरीज में खून की कमी होती है। खून न चढ़ाने पर जान का खतरा रहता है।
इसमें बच्चे गमले से मिट्टी, पेंट की पपड़ी, सीमेंट का टुकड़ा खाने लगते हैं। रक्त की कमी से पीलिया होने के साथ कमजोरी बढ़ने लगती है। गंभीर स्थिति में चेहरे की हड्डियों में भी विकार आने लगते हैं। इससे बचने के लिए खून के रिश्ते में शादी करने से बचें और शादी से पहले जेनेटिक काउंसलिंग जरूर कराएं। माता-पिता वाहक हैं तो भ्रूण में रोग की जांच कराएं।
थैलेसीमिया मरीजाें के लिए निशुल्क रक्त उपलब्ध
लोकहितम ब्लड बैंक के महासचिव अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि ब्लड बैंक में 70 बच्चे पंजीकृत हैं। इनके लिए हर महीने करीब 80-100 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है। इन्हें निशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है। पीड़ित यहां पंजीकरण करा सकते हैं।