बारिश और पारा गिरने के साथ एसएन मेडिकल कॉलेज की हड्डी रोग ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। रोजाना औसतन 350 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें जोड़, मांसपेशियों और पुरानी चोट के मरीज अधिक हैं। फिजियोथेरेपी के साथ मरीजों को घर पर व्यायाम दोहराने की सलाह दी जा रही है। वहीं बीएमडी जांच में 80 में से आधे से अधिक मरीजों में कैल्शियम की कमी मिली।
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। इसमें जोड़, मांसपेशियों और पुरानी चोट के मरीजों की संख्या अधिक है। चिकित्सक इसे बारिश की वजह से नमी और पारा कम होना बता रहे हैं। दवाएं देने के साथ मरीजों की फिजियोथेरेपी की सलाह भी दी जा रही है।
विज्ञापन
हड्डी रोग विभाग के डॉ. रजत कपूर ने बताया कि ओपीडी में रोजाना औसतन 350 मरीज आ रहे हैं। पारा कम होने से मांसपेशियों में खिंचाव, जकड़न से दर्द की परेशानी बढ़ गई है। ओपीडी में पुराने मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। इसमें गठिया, गिरने या फिर दुर्घटना से लगी पुरानी चोट के मरीज अधिक हैं। फिजियोथेरेपी विभाग के डॉ. अतुल शर्मा ने बताया कि लगातार बारिश होने से कंधे, कूल्हे, जोड़, कमर दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ गई हैं। इनकी फिजियोथेरेपी कराने के साथ घर पर भी इनको दोहराने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गठिया के दर्द वाले मरीजों में 50 से अधिक की उम्र के हैं। युवा चोट के दर्द की वजह से फिजियोथेरेपी कराने आ रहे हैं।
कैल्शियम की मिली कमी
आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी की ओर से एसएन की ओपीडी में शिविर लगाकर 80 मरीजों की बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) की जांच की गई। इसमें आधे से अधिक की कैल्शियम की कमी पाई गई। मरीजों को बचाव के लिए जागरूक किया। अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ, सचिव डॉ. संजय चतुर्वेदी और एसएन के डॉ. बृजेश शर्मा ने बताया कि सोसाइटी की ओर से बोन एंड जॉइंट महीना मनाया जा रहा है। इसमें जांच करने के बाद मरीजों को धूप लेने, पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी जा रही है।