टूंडला (फिरोजाबाद)। रेलवे कंपनी बाग और एनसीआर कॉलेज खेल के मैदान का अस्तित्व खतरे में आ रहा है। प्रयागराज डिवीजन में 160 की स्पीड से ट्रेनें दौड़ाने के लिए इन खेल मैदानों के अधिग्रहण की तैयारियां शुरू हो गई है। रेलवे ओएचई मॉडिफिकेशन के काम के लिए इन खेल मैदानों को रेल प्रशासन ठेकेदार को देगा। इसके लिए एडीईएन हेड क्वार्टर टूंडला ने नोटिस भी जारी कर दिया है।
रेलवे प्रयागराज डिवीजन के चिपयाना स्टेशन से पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन रेलवे स्टेशन तक 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ाने की योजना बनाई है। इसके लिए रेलवे को बड़ी मात्रा में ओवर हैड इलेक्ट्रिक (ओएचई) का मॉडिफिकेशन का काम करना है। इसके लिए रेलवे ठेका भी देने जा रहा है। अब ठेकेदार को इस काम के लिए टूंडला रेलवे परिक्षेत्र में 200 गुणा 40 मीटर का मैदान चाहिए। तभी ओएचई का काम पूरा हो सकेगा। इसके लिए रेल अधिकारियों की नजर टूंडला के एकमात्र एनसीआर रेलवे कॉलेज के खेल मैदान पर पड़ गई है। एडीईएन हैड क्वार्टर टूंडला द्वारा निकाले गए आदेशों के अनुसार रेलवे कॉलेज के मैदान को ठेकेदार को ओएचई मॉडिफिकेशन के काम के लिए अस्थायी तौर पर दिया जाना है।
इसका विरोध होने पर रेल अधिकारियों ने दूसरी ओर इशारा करते हुए अब कंपनीबाग स्पोर्ट्स ग्राउंड को चिह्नित किया है। अगर दोनों में से किसी भी मैदान को ठेकेदार को ओएचई मॉडिफिकेशन के काम के लिए दिया जाता है तो एनसीआर कॉलेज एवं नगर की हजारों खेल प्रतिभाओं के खेलकूद पर ग्रहण लग जाएगा।
रेलवे के ये मैदान पड़े हैं खाली
टूंडला। रेलवे के पास इस काम के लिए आरपीएफ बैरक के पास का मैदान, लाइनपार क्षेत्र में ध्वस्त किए सैकड़ों रेलवे क्वाटरों का क्षेत्र एवं गढ़ी भक्ति रोड पर भूत चौराहे के पास का मैदान एवं न्यू रेलवे कॉलोनी मनोजन केंद्र के दोनों ओर खाली पड़े मैदान हैं। जहां ओएचई मॉडिफिकेशन का काम हो सकता है।
खतरे में आ जाएगी सीबीएसई की मान्यता
टूंडला। एनसीआर कॉलेज टूंडला में पहले यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम था। अब इस कॉलेज को सीबीएसई की मान्यता मिली हुई है। सीबीएसई के नियमों के मुताबिक बच्चों के खेलकूद के लिए मैदान होना भी बहुत जरूरी है। इसके अभाव में सीबीएसई की मान्यता भी खतरे में आ सकती है। इसलिए इस मैदान को किसी अन्य कार्य के लिए नहीं दिया जा सका।
संगीता प्रधानाचार्या, एनसीआर इंटर कालेज, टूंडला
रेलवे को ओएचई मॉडिफिकेशन के काम के लिए जगह चाहिए। जिसके लिए स्थानीय अधिकारियों से बात की गई है। अगर इन दोनों मैदानों के अलावा अन्य जगहों पर काम हो सकता है तो इसके बारे में जानकारी कर विचार-विमर्श किया जाएगा।
अमित कुमार सिंह, प्रयागराज डिवीजन पीआरओ
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