रेल यात्रियों को स्टेशन और ट्रेन में प्रवेश करने के लिए एयरपोर्ट की तरह बोर्डिंग पास दिया जाएगा। प्रयागराज में यह व्यवस्था शुरू हो गई है। एक जून से दो सौ स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इनमें से 16 ट्रेनें आगरा मंडल से होकर गुजर रही हैं। प्रयागराज में संपर्करहित टिकट जांच शुरू हो गई है। इसमें स्टेशन के एंट्री गेट पर, टिकट चेकिंग स्टाफ और यात्री के बीच कांच लगाया गया है।
दोनों के बीच बिना शारीरिक संपर्क के सूचना के आदान-प्रदान के लिए टीएफटी मॉनिटर लगाए हैं। यात्री की ओर वेब कैमरा लगाया गया है। इस कैमरे से ही टिकट व पहचान पत्र की जांच की जा रही है। यात्री की पहचान व टिकट की पुष्टि के बाद उसके नाम, सीट नंबर, पीएनआर के विवरण के साथ बोर्डिंग पास जारी कर दिया जाएगा। यह पास ट्रेन में सफर के दौरान भी काम आएगा।
इसके बाद भी यात्री के पास टिकट व पहचान पत्र होना चाहिए। ट्रेन के चेकिंग स्टाफ पर मौजूद टेबलेट में भी यह सुविधा रहेगी, जिससे वह अपने टेबलेट से यात्री का विवरण देख सकेंगे। आगरा मंडल के रेलवे अधिकारियों का कहना है कि प्रयागराज में यह व्यवस्था शुरू की गई है। यह सफल रहती है तो इसे आगरा मंडल के प्रमुख स्टेशनों पर लागू किया जाएगा।
एक्सप्रेस के रूप में चलेंगी आगरा-झांसी पैसेंजर समेत चार ट्रेनें
लॉकडाउन के बाद चलीं 230 स्पेशल ट्रेनों में ज्यादातर लंबी दूरी की हैं। अब रेलवे हर मंडल से 200 किलोमीटर से अधिक दूरी की पैसेंजर ट्रेनों को मेल/एक्सप्रेस में बदलने जा रहा है। आगरा मंडल में आगरा कैंट-झांसी पैसेंजर समेत चार पैसेंजर ट्रेनें इसी माह के अंत तक संचालित होंगी। इनमें यात्रियों को रिजर्वेशन करवाना पड़ेगा।
रेलवे देशभर में तकरीबन 450 पैसेंजर ट्रेनों को मेल-एक्सप्रेस में तब्दील करने जा रहा है। यह ट्रेनें 200 किमी से अधिक की दूरी के स्टेशनों तक संचालित होंगी। इनकी स्पीड भी पैसेंजर की जगह मेल एक्सप्रेस की तरह होगी। यानी यह गाड़ियां 100 किमी या इससे अधिक की रफ्तार से दौड़ेंगी। रेलवे बोर्ड ने आगरा मंडल से 200 किमी की ऐसी ट्रेनों की सूची आज मांगी है।
इन ट्रेनों में आगरा कैंट-झांसी पैसेंजर, मथुरा-सवाई माधोपुर पैसेंजर, मथुरा- भिवानी पैसेंजर को चुना गया है। इस तरह आगरा के खाते में महज एक पैसेंजर ट्रेन ही आई है। आगरा मंडल के वाणिज्य प्रबंधक एसके श्रीवास्तव ने बताया कि अभी यह पहले दौर में चयनित पैसेंजर हैं। इन ट्रेनों को इस माह के अंतिम सप्ताह से चलाने की तैयारी है।
यह होंगे फायदे
- स्पेशल ट्रेनें लंबी दूरी की हैं, जिनमें आसानी से रिजर्वेशन नहीं मिल पा रहा है।
- 200 किमी की पैसेंजर ट्रेनों को एक्सप्रेस की तरह संचालित करने से फायदा होगा।
- इन ट्रेनों के स्टॉपेज को भी कम किया जाएगा, ताकि पैसेंजर की तरह हर स्टेशन पर नहीं रुकें।