मथुरा जंक्शन पर ट्रेन करीब दो मिनट के लिए ठहरती है। इसके बाद सीधा भरतपुर जाकर रुकती है। उसके बाद सवाई माधोपुर, कोटा, रतलाम, वड़ोदरा, सूरत, बसई रोड, तनवेल जंक्शन से होते हुए तिरुवनंतपुरम पहुंचती है। 2842 किलोमीटर का सफर यह ट्रेन करीब 31 घंटे में तय करती है। लेकिन इस ट्रेन में जीआरपी और आरपीएफ का एक सिपाही तक तैनात नहीं था।
माना जा रहा है कि बदमाश ने इसी के चलते वारदात को आसानी से अंजाम भी दे दिया। एसपी जीआरपी जोगेंद्र ने बताया कि साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनों में फोर्स की कमी के चलते जीआरपी और आरपीएफ के एस्कॉर्ट नहीं लग पाते हैं। यात्रियों ने बताया कि जब ट्रेन जंगल में धीमी हुई तो सभी घबरा गए थे। ट्रेन की रफ्तार धीमी होने पर ही बदमाश उतरकर भाग गया।
मथुरा से गुजरने वाली 50 से ज्यादा ट्रेनों में नहीं है कोई सुरक्षा
कोटा और भोपाल रूट पर चलने वाली पचास से भी ज्यादा ट्रेनें ऐसी हैं, जिनमें कोई सुरक्षा नहीं रहती है। यह सभी ट्रेनें वह हैं जो सप्ताह में एक बार या दो बार जाती हैं। फोर्स की कमी के कारण रेलवे इनमें सुरक्षा मुहैया नहीं करा पा रहा है।
स्थिति यह है कि रेलवे स्टेशनों पर भी ट्रेनों की उस तरह से चेकिंग नहीं हो पा रही है। नियम तो यह है कि हर प्लेटफार्म पर चेकिंग होनी चाहिए। जीआरपी और आरपीएफ के दस्ते पड़ताल करें लेकिन यह सब हो नहीं पा रहा है।