एटा में ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के पदाधिकारी शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी में सांसद को ज्ञापन देने पहुंचे, लेकिन सांसद का इंतजार करते रहे गए, वह कहीं और रवाना हो गए। बाद में उनके किसी प्रतिनिधि ने ज्ञापन लिया।
मंडल उपाध्यक्ष अनिल कुमार त्यागी ने बताया कि हम लोग इतनी दूर से ज्ञापन देने आए हैं। जो समय सांसद देवेश शाक्य ने हमको दिया था, ठीक उसी समय पर हम पहुंच गए। मगर वह बिना कोई सूचना दिए ही किसी दूसरे जिले के कार्यक्रम में शामिल होने चले गए। काफी देर इंतजार के बाद उनके प्रतिनिधि चेतन शाक्य पहुंचे, उनको ज्ञापन दिया। ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि रेलवे बोर्ड ने एमएसीपी लेवल 9 को मंजूरी दी थी। इसे 16 फरवरी 2018 से लागू किया गया है।
इसे 1 जनवरी 2016 से लागू किया जाए। स्टेशन मास्टरों और अन्य रेलवे कर्मियों को एनडीए का भुगतान जस्टिस मियाभोय ट्रिब्यूनल 1969 की अनुशंसा के अनुसार किया जाए। सभी स्टेशन मास्टर और अन्य रेलवे कर्मी रात में बिना विश्राम किए नियमित सेवाएं प्रदान करते हैं। इसलिए एनडीए दर की गणना के लिए मूल वेतन को 43600 रुपये तक प्रतिमाह सीमित रखने वाला फैसला भेदभावपूर्ण और मनमाना है। इस सीमा को समाप्त करते हुए सभी ग्रेड पे और वेतन भत्ते कर्मचारियों को दिए जाएं।
स्टेशन मास्टर कैडर को राजपत्रित अधिकारी का दर्जा दिया जाए। अनिवार्य रूप से ईआई रोस्टर यानी कि 12 घंटे के रोस्टर को समाप्त किया जाए। एनपीएस और यूपीएस ने रेलवे कर्मचारियों को दुखी बना दिया है। इनको समाप्त करते हुए सभी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन योजना बहाल की जाए। विजेंद्र गौतम एसएस एटा, विवेक वर्मा फिरोजाबाद, विनीत कुमार मक्खनपुर, राजेश कुमार बलरई सहित अन्य लोग मौजूद रहे। सांसद देवेश शाक्य ने बताया कि आवश्यक काम से एटा से निकलना पड़ा था। रेल कर्मियों से बात हुई थी। अपना प्रतिनिधि भेजकर ज्ञापन लिया, जो मेरे पास पहुंच गया है।