टूंडला-कानपुर रेलखंड पर टूटी पटरी
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टूंडला। कानपुर-दिल्ली रेलखंड पर जहां ट्रेनों का अत्यधिक दबाव है, वहीं इस रूट पर ट्रैक फ्रैक्चर भी सर्वाधिक होते हैं। कई बार बड़ी दुर्घटनाएं भी होने से बच गई हैं। कहने को ट्रैक की पेट्रोलिंग की जाती है, परंतु उसके बावजूद ट्रैक फ्रैक्चर का समय से पता नहीं चल पाता, तब ऐसी घटनाएं होती हैं।
कानपुर-दिल्ली रेलखंड पर अप व डाउन की ढाई से अधिक ट्रेनें दौड़ती हैं। वहीं इस रूट की मरम्मत भी काफी की जाती है, जिससे कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए, परंतु बदलते मौसम के चलते ट्रैक फ्रैक्चर आए दिन होते रहते हैं। सर्दियों के मौसम में पटरियों के सुकड़ने के चलते तो ट्रैक फ्रैक्चर होना आम बात है।
ट्रैक फ्रैक्चर की जानकारी के लिए रेलवे विभाग रेलवे ट्रैक पेट्रोलिंग कराता है। बावजूद इसके रेल फ्रैक्चर से ट्रेन के गुजरने से रेलवे प्रशासन को सबक लेना चाहिए। ट्रेन के टूटी पटरी से गुजरने के दौरान बड़ा हादसा हो सकता था।
ईएसएम सिस्टम से बची मगध एक्सप्रेस
टूंडला। कानपुर रेलखंड पर रेल फ्रैक्चर होने के बाद पटरी के टूटकर अलग होने की घटना बड़ी घटना है। हालांकि रेलवे ने ऐसी घटनाओं से रेल सुरक्षा व संरक्षा के लिए ईएसएम (इलेक्ट्रानिक्स सिग्नल मेंटनर) से जोड़ा है। अगर पटरी टूटकर अलग हो जाती है तो सिग्नल फेल हो जाते हैं। इससे पता चल जाता है कि कहीं पटरी टूट गई है। यही सामों-भर्तना स्टेशन के बीच हुआ। अगर पुराना सिस्टम होता और किसी की नजर टूटी पटरी पर न पड़ती तो गंभीर रेल हादसा हो सकता था।