आगरा के शाहगंज स्थित बारहखंभा पर रेल ओवरब्रिज बनाए जाने का काम फिर लटक सकता है। रेलवे लाइन के नजदीक बने आंबेडकर सामुदायिक भवन को हटाने के नोटिस के बाद खड़ा हुआ विवाद थमा नहीं है। रेलवे के अधिकारी इसे विभाग की जमीन बता रहे हैं। असर तीन आरओबी के निर्माण कार्यों पर पड़ सकता है। उधर, छावनी के विधायक ने रेलवे अधिकारियों से वार्ता की बात कही है।
शाहगंज में जाम की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कई साल से कवायद चल रही थी। इसके लिए छावनी के विधायक के प्रयासों से ईदगाह रेलवे स्टेशन को सीधे जोड़ने के लिए रुई की मंडी, नगला छउआ और बारहखंभा पर तीन अलग-अलग आरओबी बनाने का रास्ता साफ हुआ था। हालांकि रुई की मंडी के व्यापारियों ने पूर्व में विरोध दर्ज कराया था, लेकिन रेलवे ने काम शुरू किया।
अब बारहखंभा रेलवे लाइन पर बनने वाले आरओबी की राह में आंबेडकर सामुदायिक भवन आ गया है। इसे हटाने के लिए इंजीनियरिंग विभाग ने इजाजत मांगी थी। नोटिस देने पर विवाद खड़ा हो गया है। बसपा और आंबेडकर अनुयायियों के विरोध के कारण फिलहाल आंबेडकर भवन को ध्वस्त करने की कार्रवाई टाल दी गई है।
इसके साथ ही यहां काम भी बंद हो गया है, लेकिन रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना पर विपरीत असर पड़ेगा। एक आरओबी का काम बंद होने से पूरी परियोजना पर असर पड़ सकता है। इसके पहले भी दो बार इस परियोजना का काम लटक चुका है।
इस संबंध में छावनी के विधायक डॉ. जीएस धर्मेश का कहना है कि आंबेडकर भवन रेलवे की भूमि पर है, यह जांच का विषय है। इसके लिए रेलवे के तत्कालीन अधिकारी जिम्मेदार हैं। जब यह बना तब से कभी नोटिस क्यों नहीं दिया गया। इसके समाधान के लिए प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए रेलवे के अधिकारियों से वार्ता करेंगे।