आगरा। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल की खूबसूरती को करोड़ों कैमरों ने कैद किया है, लेकिन जब पद्मश्री रघु राय का लेंस इस संगमरमरी इमारत की ओर मुड़ा, तो जो तस्वीरें निकलकर आईं, उन्होंने फोटोग्राफी की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया। 1980 के दशक में रघु राय की ताज पर की गई फोटोग्राफी ने बेजान इमारत को जीवंत बना दिया।
रघु राय ने ताजमहल को सिर्फ एक स्मारक के तौर पर नहीं, बल्कि एक जीवंत किरदार के रूप में देखा। 80 के दशक में उन्होंने ताजमहल के अलग-अलग पहलुओं को जिस तरह से फ्रेम किया, उसने दुनिया को इस इमारत का एक नया नजरिया दिया। उनकी तस्वीरों में ताज केवल ईंट और पत्थरों का ढांचा नहीं था, बल्कि वह यमुना के किनारे के जनजीवन, स्थानीय लोगों और प्रकृति के साथ संवाद करता नजर आता था।
स्पीड कलर लैब के संजय गोयल ने बताया कि ताजमहल को कमरे में कैद करने के लिए वह कई महीनों तक यहां रहे। उनका धैर्य अद्भुत था। हर फ्रेम के लिए उन्होंने घंटों इंतजार किया। ताजमहल के साथ उनके काम ने एक आध्यात्मिक शांति और सौंदर्य को प्रदर्शित किया। निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि रघु का जाना एक अपूर्णीय क्षति है।
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फ्लैशलाइट का कभी नहीं किया उपयोग
आगरा के वरिष्ठ फोटोग्राफर विजय गोयल बताते हैं कि रघु राय ने कभी भी फ्लैशलाइट का उपयोग अपनी तस्वीरों के लिए नहीं किया। वह 1980 के दशक में तीन कैमरे एक साथ लेकर चलते थे, जिनमें 200 आईएसओ, 400 आईएसओ और 800 आईएसओ के कैमरे प्रमुख थे। तस्वीर के मुताबिक कैमरे का उपयोग करते थे।
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विजय गोयल की यादों में राय
वरिष्ठ फोटोग्राफर विजय गोयल के पास रघु राय के साथ काम करने की यादों का एक अनमोल खजाना है। उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी में उनके साथ फोटोग्राफी की। गोयल के मुताबिक वह बेहद संवेदनशील थे और उनकी मानवीय तस्वीरों ने दुनिया को तब झकझोर दिया था। काम के प्रति लगन और किसी भी दृश्य को देखने का उनका अपना एक अलग विजन था।
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विरासत जो आज भी प्रेरणा देती है
जब ताजमहल की बेहतरीन फोटोग्राफी की बात होती है, तो रघु राय का नाम सबसे ऊपर आता है। उनके द्वारा कैद किए गए 80 के दशक के वे पल आज भी आगरा और ताज के इतिहास का हिस्सा हैं। फ्रेंड्स स्टूडियो के अमित जैन बताते हैं कि रघु राय ने फोटोग्राफी को वह मुकाम दिया जो हजारों फोटोग्राफरों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके खींचे हुए फोटो का एंगल और विजन ही उन्हें अनूठा बनता है। लोग अभी उनकी फोटोग्राफी की नकल करते हैं। उनका जाना बहुत बड़ी क्षति है।
13 साल पहले आए थे आगरा
रघु राय 13 साल पहले आगरा में ताज साहित्य उत्सव के आगाज पर आए थे। 1 फरवरी 2013 को साहित्य उत्सव में ताजमहल पर आधारित अपनी 160 पेज की पुस्तक के विमोचन के बाद उन्होंने ताज पर बयां देने पर आजम खान की आलोचना की थी। तब आजम यूपी सरकार के मंत्री थे।
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...वो इश्क कहां से लाऊं
रघु ने कहा था कि एक बार उनसे कहा गया कि वह ताजमहल की तरह लोटस टेंपल पर बुक क्यों नहीं बनाते। उन्होंने जवाब दिया कि वह बुक तो बना दें, लेकिन वो कदमों के निशान और इश्क कहां से लाएं। ताज के एक-एक पत्थर और कदमों के निशान से रूबरू होने के बाद बुक बन पाई है।
ताज के साये में रघु राय ने आम आदमी के जीवन को दिखाकर उसे जीवंत बना दिया
ताज के साये में रघु राय ने आम आदमी के जीवन को दिखाकर उसे जीवंत बना दिया
ताज के साये में रघु राय ने आम आदमी के जीवन को दिखाकर उसे जीवंत बना दिया